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शिवपाल यादव के कॉलेज में पढ़ा रहे हैं फर्जी टीचर?

Tue, 06 Nov 2012 10:49 AM IST
संतोष सिंह/कानपुर
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छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध बीपीएड डिग्री कॉलेजों में टीचर्स की नियुक्ति में बड़ा खेल उजागर हुआ है। विश्वविद्यालय की गोपनीय जांच में पता चला है कि डिग्री कॉलेजों ने बड़े पैमाने पर ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति अपने यहां दिखा रखी है, जो किसी दूसरे संस्थान में पढ़ा रहे हैं।
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पूरा फर्जीवाड़ा मान्यता बरकरार रखने के लिए किया जा रहा है। इस सूची में हैबरा डिग्री कॉलेज का नाम भी है, जिसके प्रबंधक लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव हैं। रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी जा चुकी है। जल्द ही फर्जी टीचर के नाम का अनुमोदन निरस्त करने की तैयारी है।

विश्वविद्यालय से संबद्ध बीपीएड के 17 डिग्री कॉलेज हैं। ये सभी कानपुर नगर, इटावा, औरैया, इलाहाबाद, सीतापुर, फर्रुखाबाद, रायबरेली और कौशांबी आदि जिलों में हैं। इसी साल सितंबर में कराई गई विश्वविद्यालय की जांच में पता चला है कि कई कॉलेजों ने योग्य शिक्षकों के नाम अपनी फैकल्टी में दिखा रखे हैं, जबकि सच्चाई तो यह है कि इनमें से कई या तो दूसरे सरकारी या निजी संस्थानों में पढ़ा रहे हैं, या फिर रिटायर हो चुके हैं। इन सभी कॉलेजों में कम वेतन पर कम अर्हता वाले टीचर्स से पढ़ाई कराई जा रही है। इसका सीधा असर शैक्षिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
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केस-1 हैबरा डिग्री कॉलेज, इटावा
कॉलेज ने डॉ. भैया लाल यादव, डॉ. प्रवीन अहमद, डॉ. प्रमोद कुमार दास और निधि गुप्ता को अपने यहां बतौर शिक्षक दिखाया है। लेकिन डॉ. भैया लाल का सेलेक्शन टीजीटी में हो चुका है, डॉ. प्रवीन अहमद और डॉ. प्रमोद कुमार दास ने ज्वाइन ही नहीं किया, जबकि निधि गुप्ता सिंगापुर से पीएचडी कर रहीं हैं।

केस-2 वीएसएसडी कॉलेज, कानपुर
दस्तावेजों में ज्ञान स्वरूप, कैलाश नाथ तिवारी, डॉ. एसए नकवी यहां शिक्षक हैं। हकीकत में ज्ञान स्वरूप अब आईआईटी, खड़गपुर में हैं। जबकि कैलाश नाथ तिवारी (65) और डॉ. एसए नकवी (70) रिटायर हो चुके हैं।

केस-3 वंशी डिग्री कॉलेज, बिठूर, कानपुर
कॉलेज का दावा है कि अमर कुमार, सुजय और मनोज सिंह राणा उसके यहां पढ़ा रहे हैं। सच तो यह है कि अमर कुमार एलएनआईपी ग्वालियर, सुजय एलएनसीपी गुवाहाटी और मनोज सिंह राणा एलएनआईटी ग्वालियर में पढ़ा रहे हैं।

क्या हैं नियम
नेशनल टीचर्स एजूकेशन काउंसिल (एनसीटीई) के नियमों के मुताबिक बीपीएड की 50 सीटों की पढ़ाई की मान्यता दी जाती है। इन सभी को पढ़ाने के लिए एक प्रोफेसर (जिसके पास 10 साल पढ़ाने का अनुभव हो), एक रीडर और 5 लेक्चरर नियुक्त किया जाना चाहिए। रेग्यूलर स्टाफ, फुलटाइम स्केल पर ही कॉलेज की मान्यता बरकरार रहेगी। इस मानक का अनुपालन ज्यादातर कॉलेजों में नहीं किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सैय्यद वकार हुसैन ने कहा कि यह मामला गंभीर है। जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा। फिर आगे की कार्रवाई होगी। फर्जी टीचर्स की नियुक्ति निरस्त की जाएगी। जब टीचर कॉलेज छोड़कर जाते हैं तो संबंधित कॉलेज की ओर से सूचना आती है। तभी टीचिंग स्टाफ का नाम कटता है। यह भी देखा जाएगा कि कितने कॉलेजों ने नाम कटवाने की सूचना दी थी।  

वहीं, हैबरा डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आरएस यादव का कहना है कि यह गलती विश्वविद्यालय की है। जब टीचर कॉलेज छोड़कर गए और नए टीचर्स के नाम का अनुमोदन हो गया है तो पुराने टीचर्स के नाम काट देने चाहिए थे। यह जिम्मेदारी कॉलेज की नहीं होती है। उनके यहां टीचिंग स्टाफ पूरा है। नियुक्ति में किसी तरह की धांधली नहीं की है।
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