स्वामी नित्यानंद का पौरुष परीक्षण हो पाया था या नहीं, ये सवाल इन दिनों चर्चा में है और उसी के साथ चर्चा में हैं पौरुष परीक्षण की तकनीक। ये सवाल आम तौर पर पूछा जा रहा है कि पौरुष परीक्षण होता क्या है? पौरुष परीक्षण करने से क्या किसी बलात्कार की सचाई का पता चलता है?
आइए, इन्हीं सवालों को सुलझाने की कोशिश करते हैं। जानते हैं कि पौरुष परीक्षण होता क्या है? इसके कानूनी और तकनीकी पहलू क्या हैं?
क्या है पौरुष परीक्षणः पौरुष परीक्षण के जरिए किसी व्यक्ति को यौन क्षमता का परीक्षण किया जाता है। बलात्कार जैसे मामलों में पौरुष परीक्षण के जरिए ये तय करने का प्रयास किया जाता है कि व्यक्ति यौन अपराध करने में शारीरिक रूप से सक्षम है या नहीं?
परखी जा सकती है यौन क्षमता?
डॉक्टरों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति यौन संबंध बनाने में सक्षम नहीं है तो इसका मतलब ये कतई नहीं होता कि वह नपुंसक है। और यह भी संभव नहीं कि यदि कोई व्यक्ति पौरुष परीक्षण पास कर ले तो वह शारीरिक संबंधों बनने में भी समर्थ हो।
डॉक्टरों की मुताबिक, नपुंसकता शारीरिक कारणों से अधिक मानसिक कारणों से होती है। एक व्यक्ति के शरीर में हार्मोंस के सामान्य होने और स्पर्म की संख्या सामान्य होने के बाद भी, वह नपुंसक हो सकता है। कई बार इससे उलट हालात भी हो सकते हैं।
ऐसे में मात्र पौरुष परीक्षण में सफल रहने के आधार पर ये मानना की कोई व्यक्ति शारीरिक संबंध बना ही सकता है, 100 फीसदी ठीक नहीं है।
क्या व्यक्ति नपुंसक होता है?
कई परीक्षणों से ये साबित भी हो चुका है यदि कोई व्यक्ति तनाव में है, बीमार है या अपने पार्टनर के साथ सहज नहीं है, तो वह शारीरिक संबंध नहीं बना पाता। यदि कोई व्याक्ति होमोसेक्सुअल हो तो भी वह शारीरिक संबंध बना नहीं पाता। हालांकि इन सभी मामलों में व्यक्ति नपुंसक कतई नहीं होता।
क्या है कानूनी पहलूः आम तौर पर बलात्कार के मामलों में पौरुष परीक्षण कराया जाता है। बलात्कार जैसे मामलों में यदि अपराधी अपने बचाव में यदि ये दलील देता है कि वह नपुंसक है और यौन संबंध नहीं बना सकता, तो ऐसे मामलों में न्यायालय को पौरुष परीक्षण का आदेश देना पड़ता है।
पौरुष परीक्षण के कई प्रकार
किसी व्यक्ति का पौरुष परीक्षण कई प्रकार से किया जाता है।
ब्ल्ड टेस्टः ब्लड टेस्ट के जरिये ये जानने की कोशिश की जाती है कि व्यक्ति को डॉयबिटीज की समस्या या किडनी का कोई डिसऑर्डर तो नहीं है, जो पौरुष को प्रभावित कर रहा हो।
नॉक्टर्नल पेनाइल ट्यूमीसेंस या रीजिस्कैन मॉनिटरींगः इस तकनीकी के जरिए डॉक्टर रात में किसी व्यक्ति के 'स्पॉन्टेनियस इरेक्शन' की संख्या जानने की कोशिश करते हैं। नींद में यदि 'स्पॉन्टेनियस इरेक्शन' सामान्य पाएं जाते हैं, तो ये माना जाता है कि व्यक्ति नपुंसक नहीं है।
सिरम टेस्टोस्टेरॉन लेवलः इसमें टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को लैब में जांचा जाता है। हालांकि टेस्टोस्टेरॉन का इरेक्शन में बहुत ही कम रोल होता है।
पेनाइल डॉप्लर लेवलः इस टेस्ट की सहायता से ये जाना जाता है कि पुरुष के यौनांग में रक्त प्रवाह की गति कैसी है?
इसके अलावा विजुअल इरेक्शन परीक्षण की तकनीक से ये डॉक्टर सामन्य अवस्था में और इरेक्शन की हालत में पेनिस का परीक्षण करते हैं। एक अन्य तकनीकी गोल्डेन स्टेंडर्ड पोटेंसी टेस्ट भी होती है, जिससे व्यक्ति के लिबिडो को परखा जाता है।