केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आईटी एक्ट की धारा-66ए से नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता। मूल अधिकारों का दायरा असीमित नहीं है। इस धारा के तहत आक्रामक या अपमानजनक संदेश भेजने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
इससे अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन नहीं होता है। सरकार ने कहा है कि इस धारा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार योग्य नहीं है। सर्वोच्च अदालत को इसे खारिज कर देना चाहिए। फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक संदेश लिखने पर दो लड़कियों की गिरफ्तारी के मामले के बाद दायर याचिका के जवाब में सरकार ने अपने हलफनामे में यह दलील दी है।
सरकार ने सर्वोच्च अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि विश्वभर में 2.5 बिलियन ईमेल अकाउंट और 700 मिलियन इंटरनेट उपयोग करने वाले लोग हैं। इसमें से 12.50 करोड़ लोग इंटरनेट उपयोग करते हैं और 6 करोड़ लोगों के ईमेल अकाउंट हैं। आईटी एक्ट को इसका दुरुपयोग रोकने के लिए बनाया गया था। इसमें सुधार के लिए 2005 में विशेष समिति का गठन किया गया था।
समिति ने इसके दायरे को और बढ़ाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद लोकसभा में दिसंबर, 2006 में इस अधिनियम में संशोधन के लिए पेश किया गया था। आईटी एक्ट की धारा-66ए के तहत सार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक संदेश के जरिए आक्रामक, नफरत फैलाने वाले, अपमानजनक या आपत्तिजनक संदेश लिखने पर कानूनी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है, जबकि अन्य धाराओं में इंटरनेट हैकिंग, पहचान चुराने सहित अन्य अपराध के लिए प्रावधान किया गया है।
केंद्र ने कहा है कि आईटी एक्ट से अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्रदान नागरिकों के मूल अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है। याचिका में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा है कि आईटी एक्ट की धारा-66ए को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार योग्य नहीं है। अदालत से गुजारिश है कि इसे खारिज किया जाए।
केंद्र ने कहा है कि आपराधिक मामलों में नागरिकों के अधिकार सीमित हैं और मूल अधिकारों का दायरा भी असीमित नहीं है। सरकार ने कहा है कि तकनीक के विकास को ध्यान में रखते हुए आईटी एक्ट में संशोधन किया गया था। इसमें किसी भी प्रकार के बदलाव की गुंजाइश नहीं है और इस संबंध में की गई मांगों पर सरकार को आपत्ति है।
वहीं महाराष्ट्र सरकार ने अपने हलफनामे में दो लड़कियों को फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी लिखे जाने के मामले में गिरफ्तार किए जाने का पूरा ब्यौरा पेश किया है। राज्य सरकार ने कहा है कि इस मामले में जांच की जा रही है। राज्य में किसी भी तरह से नागरिक अधिकारों को सीमित नहीं किया गया है।