फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेटली के बजट पर टिकी देश की आस भरी नजर

विज्ञापन
विज्ञापन
वित्त मंत्री अरुण जेटली शनिवार को संसद में जब अपना पहला पूर्ण आम बजट पेश करेंगे तो उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। उन्हें अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने, निवेशकों में भरोसा कायम करने और सार्वजनिक खर्च को बढ़ावा देने के उपाय तो करने ही होंगे, साथ ही कर में छूट के जरिए भाजपा के मध्य वर्ग के मतदाताओं को भी साधना होगा।
विज्ञापन


बजट में ये छूट, टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाने के रूप में या फिर बचत योजनाओं में निवेश सीमा बढ़ाने के तौर पर सामने आ सकती है। जेटली पर भले ही गठबंधन की राजनीति का दबाव नहीं है। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिला झटका जरूर उनके ध्यान में होगा।

उन्हें बजट में इस साल अक्तूबर में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के उपायों का भी ख्याल रखना होगा। उनका मुख्य जोर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बड़े सुधारों के जरिए रोजगार पैदा करने पर भी रहेगा।
विज्ञापन

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी उम्‍मीद

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां तथा निवेशक बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। सभी नजरें जेटली पर टिकी हैं कि क्या वह सब्सिडी में कटौती करने के साथ ही श्रम और वित्तीय सुधारों का साहस दिखा पाएंगे।

क्या वह वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 3.6 फीसदी के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने की सरकार की प्रतिबद्धता को आगे ले जाएंगे।

बजट में देश के लाखों युवाओं के लिए नौकरियां पैदा करने के कदम उठाने की चुनौती भी वित्त मंत्री के लिए चिंता का सबब है। एक सर्वे बताता है कि देश की बढ़ती युवा आबादी को रोजगार देने के लिए हर साल 1.20 करोड़ नौकरियां पैदा करने की जरूरत है। जबकि भारत की दो खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी मात्र 15 फीसदी ही है।
विज्ञापन

मेक इन इंडिया को बढ़ाने का भी दबाव

ऐसे में मेक इन इंडिया अभियान के तहत बजट में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा। जेटली बखूबी जानते हैं कि निवेश बढ़ाने और मांग बढ़ाने के लिए उन्हें जनता के हाथ में ज्यादा पैसा देना होगा।

इसलिए माना जा रहा है कि वह टैक्स छूट की मौजूदा ढाई लाख रुपये की सीमा को बढ़ा सकते हैं, टैक्स स्लैब में बदलाव कर सकते हैं या फिर बचत योजनाओं में निवेश की सीमा बढ़ाकर वेतनभोगी लोगों को राहत दे सकते हैं।

इसके अलावा वह हाउसिंग सेक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए होम लोन पर टैक्स छूट की सीमा डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर सकते हैं। स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजनाओं में निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट भी बढ़ाई जा सकती है।

जेटली केरोसिन और एलपीजी सब्सिडी पर भी रोडमैप का ऐलान कर सकते हैं। इसके साथ ही खाद्य और उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी भी सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजने के उपाय बजट में शामिल हो सकते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें