देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरा एनसीआर जल्द ही एक मजबूत सुरक्षा कवच के दायरे में होगा। दुश्मन की कोई मिसाइल इस कवच को नहीं भेद सकेगी, उसे आकाश में ही मार गिराया जाएगा। इस अभेद्य सुरक्षा कवच को तैयार करने के लिए शुक्रवार को स्वदेश में विकसित बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड का कामयाब परीक्षण ओडिशा के तट पर किया गया।
इस परीक्षण में पहले एक ‘दुश्मन’ मिसाइल दागी गई, जिसे सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल ने हवा में ही नष्ट कर दिया। दोपहर 12:52 बजे धरती से 14.5 किमी की ऊंचाई पर इंटरसेप्टर मिसाइल ने दुश्मन मिसाइल को भेदा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम के निदेशक अविनाश चंदर ने कहा कि भारत बहु स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम इस सिस्टम को 2014 तक एनसीआर में तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं।
परीक्षण में दुश्मन मिसाइल के तौर पर धरती से धरती पर मार करने वाली पृथ्वी मिसाइल को मोबाइल लांचर से दागा गया। यह मिसाइल चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के लांच कांप्लेक्स-3 से छोड़ी गई। इसके चार मिनट के अंदर ही इंटरसेप्टर मिसाइल व्हीलर द्वीप पर पोजीशन ले चुकी थी। राडार से सिगनल मिलते ही इस मिसाइल को दाग दिया गया और इसने वायुमंडल के अंदर ही दुश्मन मिसाइल यानी पृथ्वी को मार गिराया।
दो तरह के सिस्टम
मिसाइल शील्ड में दो तरह के सिस्टम हैं। एक में दुश्मन मिसाइल को वायुमंडल के अंदर भेदा जाता है, जबकि दूसरे में दुश्मन मिसाइल को वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले ही बहुत ऊंचाई पर नष्ट कर दिया जाता है।
इंटरसेप्टर मिसाइल
इंटरसेप्टर मिसाइल 7.5 मीटर लंबी होती है, इसे एडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल कहा जाता है।
वजन - 1200 किलोग्राम
गति - 4.5 मैक