सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि निर्वाचन आयोग कभी-कभी अति उत्साह में फैसले ले लेता है। यह टिप्पणी सर्वोच्च अदालत ने आयोग के उस आदेश पर की जिसमें कहा गया था कि चुनाव के दौर में यदि किसी भी व्यक्ति के पास ढाई लाख रुपये से अधिक की नकदी मिलती है तो उसे जब्त कर लिया जाए। हालांकि अदालत ने गत वर्षों में आयोग की ओर से अच्छा कामकाज किए जाने की तारीफ भी की।
जस्टिस डीके जैन की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने किसी व्यक्ति के पास से ढाई लाख रुपये से अधिक की नकद राशि मिलने पर उसे जब्त करने का निर्वाचन आयोग का आदेश असंवैधानिक करार दिया था। पीठ ने कहा कि आयोग ने कुछ सालों में बहुत अच्छा काम किया है और हम इसकी सराहना करते हैं। हम आपको इसके लिए श्रेय देना चाहते हैं। लेकिन कभी-कभी आप अति उत्साही हो जाते हैं।
पीठ ने निर्वाचन आयोग की याचिका पर कोई आदेश पारित किए बगैर ही सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। हाईकोर्ट ने नौ नवंबर को भाग्योदय जन परिषद् और गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की जनहित याचिका पर निर्वाचन आयोग के आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि यह सिलसिला तुरंत रोका जाए।
आयोग ने तीन अक्तूबर को यह आदेश दिया था। इसके तुरंत बाद आयोग ने राज्य के लिए 587 विशेष निगरानी दल और 182 उड़न दस्तों का गठन किया था। इस आदेश के अंतर्गत की गई कार्रवाई के तहत अब तक बिना किसी हिसाब-किताब के 22 करोड़ 66 लाख रुपये जब्त किए गए थे। जब्त की गई रकम आयकर विभाग को सौंप दी गई थी। निर्वाचन आयोग के आदेश पर राज्य में की जा रही कार्रवाई के कारण प्रदेश व्यापारी समुदाय में गहरा असंतोष व्याप्त था।