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स्वदेशी परमाणु रिएक्टर से बिजली के लिए करना पड़ेगा इंतजार

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स्वदेशी परमाणु रिएक्टरों से बिजली उत्पादन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। चार स्वदेशी प्रोजेक्टों का निर्माण चल रहा है लेकिन इसे पूरा होने में कम से कम चार साल और लग जाएंगे।
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केंद्र सरकार ने स्वदेशी तकनीक और विदेशी सहयोग से दस नए प्रोजेक्टों को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट के लिए स्थल चयन कर लिया गया है। अगले साल से इनका निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

परमाणु ऊर्जा विभाग के सूत्रों का कहना है कि केंद्र ने परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर दस हजार मेगावाट करने के लिए कार्ययोजना तय की है। इसके तहत काम चल रहा है।
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नए स्वदेशी परमाणु प्रोजेक्ट हरियाणा, मध्य प्रदेश के भीमपुर, कर्नाटक के कैगा और राजस्थान के माही बंसवाड़ा में प्रस्तावित हैं। इनमें लगभग 3500 मेगावट परमाणु ऊर्जा उत्पादित हो सकेगी।

इसके अलावा विदेशी सहयोग से तमिलनाडु के कुडकुलम, महाराष्ट्र के जेतापुर, गुजरात के मिठी वरदी, और पश्चिम बंगाल के हरिपुर में बनाए जाएंगे। इन प्रोजेक्टों पर काम अगले साल तक शुरू हो सकता है।
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चार प्रोजेक्ट पर चल रहा काम

वर्तमान में 2800 मेगावाट क्षमता के चार स्वदेशी प्रोजेक्टों का निर्माण चल रहा है। ये प्रोजेक्ट गुजरात के ककरापार और राजस्थान के रावतभाटा में बन रहे हैं। चार साल बाद इन प्रोजेक्टों से बिजली मिल सकेगी।

परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर बिजली की मांग को पूरा करने के लक्ष्य के तहत फिलहाल लगभग 5780 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। चार साल बाद यह क्षमता बढ़कर लगभग 1080 मेगावाट हो जाएगी। सूत्रों ने बताया कि नए प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई है।

तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट का प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए प्रयास चल रहा है। कलपक्कम में इसके अलावा भी 600 मेगावाट के दो और प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे।

अमेरिका और फ्रांस समेत बारह देशों के साथ भारत का परमाणु करार हो चुका है। कुछ और देशों से इस लिए बातचीत चल रही है। विदेशी सहयोग से बनने वाले संयंत्रों में संबंधित देश ही ईंधन आपूर्ति करेगा।
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