यूपी में घाटे के नाम पर विद्युत दरें बढ़ाकर उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डाल रही बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के हक पर भी डाका डाल रही हैं। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के प्रावधान के अनुसार समय से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को बिल में 0.25 फीसदी की छूट नहीं दी जा रही है। अक्टूबर के बिल से ही पीवीवीएनएल अपने उपभोक्ताओं की जेब से करीब 2 करोड़ रुपये झटकने जा रहा है।
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की सिफारिश पर प्रदेश सरकार ने पिछले महीने विद्युत दरों में 12 फीसदी बढ़ोतरी की थी। नया टैरिफ प्लान 12 अक्तूबर से लागू हो चुका है। नियामक आयोग ने नए टैरिफ आर्डर 2014-15 में निर्धारित तिथि से पहले बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को 0.25 फीसदी छूट और देरी से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर 1.50 फीसदी पेनाल्टी लगाने का प्रावधान किया है, लेकिन बिजली कंपनियों ने बिलिंग सॉफ्टवेयर में खेल कराते हुए छूट संबंधी प्रावधान को ही गोल करा दिया। अक्तूबर के जो बिल उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे हैं, उन बिलों में रिबेट का कॉलम ही नहीं है।
इस कारण कंपनियों के खाते में उपभोक्ताओं को मिलने वाले छूट के करोड़ों रुपये पहुंच रहे हैं। अकेले पीवीवीएनएल की बात करें तो कंपनी में हर महीने करीब 800 करोड़ रुपये की बिलिंग होती है। 0.25 फीसदी की छूट के हिसाब से कंपनी के खाते में 2 करोड़ रुपये पहुंचने जा रहे हैं। इसमें मेरठ शहर के उपभोक्ताओं के भी करीब 15 लाख रुपये शामिल हैं। जब तक सॉफ्टवेयर सही नहीं होगा तब तक उपभोक्ताओं का छूट का पैसा कंपनी के खाते में जाता रहेगा।