देश की संसद में 40 लोकसभा सांसद भेजने वाले बिहार में लोकसभा चुनाव हमेशा की तरह इस बार भी जातीय गणित और सामाजिक समीकरणों पर ही टिका हुआ है।
हालांकि पटना समेत शहरी इलाकों और कस्बों में नरेंद्र मोदी की चर्चा खूब है लेकिन जैसे ही आप सड़क छोड़कर गावों में उतरते हैं तो बिहार की राजनीति का सामाजिक यथार्थ खुलकर सामने आ जाता है।
हालांकि नरेंद्र मोदी की पिछड़ी जाति, रामविलास पासवान और कोईरी नेता उपेंद्र कुशवाहा से गठबंधन ने भाजपा को इतनी बढ़त दे दी है कि वह अपने सवर्ण जनाधार के साथ अति पिछड़ों और दलितों के एक वर्ग को जोडऩे में कामयाब होती दिख रही है और हर सीट पर मुकाबले में है।
कहीं नमो नमो का जाप तो कहीं नीतीश के दीवाने
पटना से बाहर निकलकर दीदारगंज, सबलगंज, फतुहा, कुशरूपुर, कुर्था, मोसीपुर, बैकुंठपुर, ब्रह्मापुर, सकुनपुरा, डोमा, कल्याणपुर, अथमल गोला, सालिमपुर, मलाही, बाढ़, मोर, मोकामा, शिवनार, शेरपुर, हाथीदा, बख्तियारपुर, मालपुर, डूमरा, बढ़हिया, जैतपुर, तहदिया, प्रतापपुर, लक्खी सराय, दरियापुर, मनकट्ठा होते हुए करीब पौने दो सौ किलोमीटर की जमुई तक की यात्रा में जहां भी रुक कर लोगों से बात की, वहीं बिहार की चुनावी तस्वीर खासी मिली जुली दिखाई दी।
कहीं नमो नमो का जाप करते हुए मोदी के मतवाले राही मिले तो कई जगह नीतीश कुमार के दीवाने भी दिखाई दिए। वहीं कहीं कहीं लालू यादव के भक्तों ने भी हमारा ध्यान खींचा।
मतदाता का है कहना, चुनाव में पहले जैसा जोश नहीं
जमुई रोड पर सडक से हटकर भजौर गांव की चौपाल में ताश खेलते गांव वालों से मुलाकात होती है। पचास साल की उम्र से ज्यादा के लोग हैं, कई चुनाव देख चुके हैं। कहते हैं कि इस बार चुनाव में किसी के लिए कोई जोश नहीं है, जैसा पहले होता था।
रमेश कुमार सिंह कहते हैं कि वह नीतीश कुमार के काम से इतना खुश हैं कि भले ही उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना न हो लेकिन वोट जद(यू) को ही देंगे। पास ही बैठे शंभूशरण सिंह सहमत नहीं हैं।
वह कहते हैं पिछली बार जद (यू) को दिया था, इस बार बदलाव के लिए भाजपा उनकी पसंद है। राजपूत बहुल इस गांव में सियासी पसंद विभाजित है।
लोगों का अब भी याद आ रहा है इंदिरा का शासन
मनियड्डा गांव के कमल मंडल मेहनत मजूरी करते हैं। अपनी पत्नी सविता देवी के साथ बैठे मिले। पूछने पर तपाक से बोले धर्म की बात करने वालों से देश नहीं चल सकता।
देश वही चला सकता है जो सबको साथ लेकर चले। बात को आगे बढ़ाकर सविता देवी कहती हैं कि इंदिरा गांधी ने देश को चलाकर दिखाया था। लेकिन दोनों दपंत्ति बिहार में कांग्रेस के कमजोर होने से निराश दिखे।
उनके लिए नीतीश और लालू दोनों धर्मनिरपेक्ष हैं जो केंद्र में यूपीए की सरकार अगर बनी तो वैसे ही समर्थन देंगे जैसे अभी तक मुलायम और मायावती ने दिया।
पासवान-भाजपा की जोड़ी और माई समीकरण
सरारी गांव की दलित बस्ती में पासवान समुदाय के लोगों से बात हुई। सब राम विलास पासवान और भाजपा के गठबंधन के समर्थन में दिखे।
इसी गांव के मिथिलेश कुमार साह कहते हैं कि इस बार हम सिर्फ मोदी को देख रहे हैं। वहीं जमुई के बाजार में प्रदीप कुमार यादव कहते हैं कि लालू यादव का मुस्लिम यादव (माई) समीकरण फिर मजबूत हो गया है।
जमुई पटना मार्ग के कस्बे और बाहुबलियों का इलाका माने जाने वाले लक्खी सराय में बर्तन कारोबारी कमल वर्मा के मुताबिक 90 फीसदी लोग मोदी के लिए वोट करेंगे।
लेकिन दुकान में बैठी महिला रामा देवी कहती हैं कि हमने अभी तय नहीं किया है कि किसे वोट देंगे। बुजुर्ग मोहम्मद हुसैन की पहली पसंद जद(यू) है।