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उम्मीदवार खरीद रहे आप-मोदी की कामयाबी वाला फंडा

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लोकतंत्र के महापर्व लोकसभा चुनाव में कमाई के अवसर भुनाने के लिए कई कंपनियां भी मैदान में उतर चुकी हैं। खासतौर पर जिन उम्मीदवारों के पास समर्पित कार्यकर्ताओं की फौज नहीं है, उनके प्रचार अभियान से लेकर बूथ लेवल मैनेजमेंट, जनसंपर्क और चुनाव की पूरी रणनीति तैयार करने का काम ये कंपनियां कर रही हैं।
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हाल के सालों तक इस तरह की कंपनियों की भूमिका सिर्फ चुनाव सर्वे तक सीमित थी, लेकिन सूचना क्रांति की ताकत और पैराशूट उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या ने चुनाव में कमाई के नए रास्ते खोले हैं।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की कामयाबी और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के हाईटेक प्रचार के बाद देशभर के नेताओं को इलेक्शन मैनेजमेंट का सबक सीखने की जरूरत पड़ रही है।
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सॉफ्टवेयर के जरिए इलेक्शन मैनेजमेंट

तेजी से बढ़ते इस बाजार पर कब्जे के लिए कई कंपनियां मैदान में हैं। आईआईटी खड़गपुर से पढ़े पल्लव पांडे की कंपनी विप्लव कम्युनिकेशंस ने एक संसदीय क्षेत्र मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसकी मदद से उम्मीदवार पंचायत स्तर पर राजनीतिक समीकरण की जानकारी ले सकते हैं।

चुनाव आयोग से मिली वोटर लिस्ट से डुप्लीकेट नाम हटाकर उम्मीदवार के संभावित मतदाताओं को छांटने के लिए भी विप्लव की कंपनी ने एक सॉफ्टवेयर बनाया है।

वसूली जा रही है डेटा बैंक की कीमत
पिछले दो साल के दौरान देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के जरिए राजनीतिक तौर पर जागरूक मतदाताओं का वोट बैंक तैयार हो चुका है। इस डेटा बैंक में मतदाताओं के फोन नंबर, उनका वोटर कार्ड, पता और परिवार में लोगों की संख्या जैसी अहम जानकारियां हैं।

प्रति वोटर एक से दो रुपए चार्ज

इसी तरह के डेटा के बूते कंपनियां उम्मीदवारों को लुभा रही हैं। चुनाव प्रबंधन से जुड़ी कंपनी इलेक्शन आवाज के संचालक जेपी सिंह बताते हैं कि पार्टी व उम्मीदवार के समर्थकों, न्यूट्रल वोट और निगेटिव वोट की पहचान कर उन तक पहुंच बनाना चुनाव के नतीजे पलट सकता है।

इस तरह की सेवाओं के लिए प्रति वोटर एक से दो रुपए तक चार्ज किए जाते हैं। जिस कंपनी के पास जितना सटीक डेटा है, उसका रेट उतना ही ज्यादा।

आमतौर पर एक लोकसभा सीट पर इलेक्शन मैनेजमेंट का खर्च 10-15 लाख रुपए के बीच होता है।
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मिस्ड कॉल के जरिए बना डेटा पूल

लोकपाल आंदोलन में मिस्ड कॉल के जरिए लोगों को शामिल करने का तरीका राजनीतिक दलों को खूब भा रहा है।

भाजपा और आप समेत कई पार्टियों ने मिस्ड कॉल के जरिए अपने समर्थकों का डेटा बैंक तैयार किया है। जिससे लोगों तक पहुंच बनाना आसान हो गया है।

विप्लव कम्युनिकेशंस के हेड नवीन कुमार का कहना है कि बेहद कम समय और सीमित संसाधनों में मतदाताओं तक पहुंचना बड़ी चुनौती है। इसलिए इलेक्शन मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं देने वाली कंपनियों की मांग बढ़ती जा रही है।
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