चुनाव आयोग ने राजनीतिक चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के स्तरहीन आचरण एवं बयानबाजी पर गहरी नाराजगी जताते हुए सभी दलों के अध्यक्षों को पत्र भेजकर तत्काल इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने को कहा है।
आयोग की ओर से राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पांच राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान स्तरहीन बयानों एवं गतिविधियों की होड़ सी लगी है।
यही नहीं इस बारे में चुनाव आयोग में पार्टियों और नेताओं के खिलाफ शिकायतों की बाढ़ सी आई हुई है। पार्टियों से जुड़े लोग न केवल उत्तेजक बयान दे रहे हैं बल्कि एक दूसरे खिलाफ अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
कुछ मामलों में लोग सारी मर्यादा भूलकर गाली गलौज की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह भी देखने में आ रहा है कि नेता एक दूसरे पर निजी हमले कर रहे हैं। इस आशय के पोस्टर तथा होर्डिंग भी लगाए जा रहे हैं।
प्रचार भाषणों में जाति एवं धर्म के आधार पर अपील करने की भी शिकायतें हैं। यह सारे मामले आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने वाले कृत्य हैं।
चुनाव आयोग ने कहा कि माना कि लोगों को बोलने तथा विचार व्यक्त करने का संविधान के तहत अधिकार मिला हुआ है। लेकिन इस अधिकार के तहत मर्यादा एवं नैतिकता की सीमाओं का उल्लंघन, शांति भंग अथवा दूसरे की मानहानि का अधिकार किसी को नहीं है।
विधानसभा चुनावों में इस तरह के आचरण की गंभीरता को इसी बात से समझा जा सकता है कि देश की दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों (भाजपा एवं कांग्रेस) की ओर से आचार संहिता के उल्लंघन की बार-बार शिकायतें की जा रही हैं।
इसी आधार पर वे एक दूसरे की मान्यता रद्द कर चुनाव चिन्ह को जब्त करने का भी आवेदन कर रही हैं।
आयोग इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है लेकिन आयोग चाहता है कि सभी दल यह सुनिश्चित करें कि बार-बार आचार संहिता का उल्लंघन कर उनके नेताओं द्वारा गाली गलौज की भाषा का इस्तेमाल न किया जाए। ऐसा होने पर संबंधित पार्टी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।