केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत के निर्वाचन आयोग को चुनाव के दौरान उम्मीदवार की ओर से किए गए खर्च के ब्यौरे के सही या गलत होने की जांच का अधिकार नहीं है।
सर्वोच्च अदालत में मंगलवार को दाखिल जवाब में सरकार ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून (आरपीए एक्ट) के तहत आयोग को ऐसा करने का हक नहीं है। सरकार ने अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती की राय भी इस जवाब में शामिल किया है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव खर्च का ब्यौरा न पेश किए जाने का मसला ही आयोग के अधिकारक्षेत्र में आता है। अगर ब्योरा दिया गया है तो आयोग आगे कुछ भी नहीं कर सकता।
सर्वोच्च अदालत की ओर से गत वर्ष मई में जारी किए गए नोटिस पर कानून मंत्रालय ने हलफनामा दायर कर यह स्पष्टीकरण महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की उस याचिका पर दिया है, जिसमें उन पर 2009 के राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान पैसा देकर खबर प्रकाशित कराने का कथित आरोप है।
चव्हाण ने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि पैसा देकर खबर छपवाने की शिकायत पर चुनाव आयोग विचार नहीं कर सकता। यह उसके अधिकार से बाहर है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने चव्हाण के खिलाफ जांच जारी रखने का आदेश दिया था।
हलफनामे में मंत्रालय ने कहा है कि आरपीए एक्ट की धारा-10 के तहत आयोग को चुनाव के दौरान उम्मीदवार के खर्च के ब्योरे के सही या गलत होने की जांच करने का अधिकार नहीं दिया गया है। चुनाव नियम-1961 में आयोग को प्रदान किए गए अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर सकता है।
सरकार ने अटॉर्नी की राय पर चुनाव नियम पर विचार करने की जरूरत पर जोर दिया है, क्योंकि इस नियम में आयोग को ब्योरे के सही या गलत होने की परख करने का रास्ता खुला रखा गया है। हालांकि चव्हाण के मामले में आयोग ने 2 अप्रैल, 2011 को जारी आदेश में आरपीए एक्ट की धारा-10 का हवाला ही दिया था। आयोग ने चव्हाण के खिलाफ मुख्तार अब्बास नकवी व अन्य की शिकायत पर चुनाव खर्च जांचने का निर्णय लिया था।
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने चव्हाण के खिलाफ आयोग की जांच पर रोक नहीं लगाई थी। साथ ही आयोग को 10 जून तक जांच पूरी कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
क्या है मामला--
वर्ष 2009 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान चव्हाण पर पैसे देकर खबर प्रकाशित कराने का आरोप है। इसकी शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने चव्हाण के चुनाव खर्च की जांच करने का फैसला किया था।
नकवी ने की थी शिकायत
अशोक चव्हाण के खिलाफ के खिलाफ चुनाव आयोग का दरवाजा भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने खटखटाया था। साथ ही अन्य लोगों की ओर से भी आयोग से शिकायत की गई थी।
क्या है हलफनामे का मजमून
जनप्रतिनिधित्व कानून (आरपीए एक्ट) की धारा-10 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव के दौरान उम्मीदवार के खर्च के ब्योरे के सही अथवा गलत होने की जांच कराने का अधिकार नहीं है। अगर उम्मीदवार ने ब्योरा दे दिया है तो फिर आयोग आगे कुछ भी नहीं कर सकता।