लोकसभा चुनाव के दौरान अब रैलियों और जनसभाओं की मंजूरी लेने के लिए प्रत्याशियों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पडे़गे। उन्हें रैली के लिए अब एक ही जगह से मंजूरी मिल जाया करेगी।
चुनाव आयोग ने लालफीताशाही में कटौती करते हुए शुक्रवार को इस बाबत आदेश जारी कर सभी संसदीय सीटों में इसके लिए ‘एकल खिड़की व्यवस्था’ स्थापित करने को कहा है। यह निर्देश सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को जारी किया गया है।
चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी निर्वाचन अधिकारियों को ‘एकल खिड़की मंजूरी सेल’ बनाना चाहिए। ताकि उम्मीदवारों को जनसभाओं, रैलियों और चुनाव प्रचार के लिए वाहनों व हेलीकॉप्टरों के लिए गैर व्यावसायिक एयरपोर्ट व हैलीपैड के इस्तेमाल की मंजूरी दी जा सके।
अधिकारियों को इसके लिए बाकायदा स्टाफ रखना होगा, जो ऐसी गतिविधियों की मंजूरी के लिए दिए गए आवेदनों का हिसाब तो रखेगा ही, साथ में इस पर जल्द कार्रवाई के लिए आवेदन को दूसरे विभागों के नोडल अफसरों को हस्तांतरित करेगा।
राज्य पुलिस के सक्षम अधिकारी और जमीन मालिक एजेंसियों से मंजूरी हासिल करने के बाद एक डीएसपी स्तर का अधिकारी ऐसे आवेदनों पर फैसला या मंजूरी देगा।
नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवार या पार्टी चुनावी आयोजनों के लिए ट्रैफिक पुलिस से अलग से मंजूरी की मांग नहीं करेंगे। ‘पहले आओ पहले पाओ’ के तहत आयोजन के कम से कम 48 घंटे पहले दिए गए आवेदनों पर ही विचार किया जाएगा।
मंजूरी देने वाली सेल को आवेदन देने के 36 घंटे के भीतर इस पर फैसला लेना होगा। 36 घंटे के बाद लंबित पडे़ आवेदनों के बारे में निर्वाचन अधिकारी को सूचित करना होगा।