लोकसभा चुनाव में तय सीमा से ज्यादा खर्च करने संबंधी विवादित बयान देकर लोकसभा में भाजपा संसदीय दल के उप नेता गोपीनाथ मुंडे मुश्किल में फंस गए हैं।
चुनाव आयोग ने उन्हें इस मामले में नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने मुंडे से 20 दिन में अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।
उधर, मुंडे के विवादित बयान पर भाजपा रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है, जबकि कांग्रेस उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म करने की मांग कर रही है।
महाराष्ट्र के बीड से सांसद मुंडे ने दावा किया है कि उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में 8 करोड़ रुपये खर्च किए थे। उनके इस बयान पर उनकी पार्टी रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि यह मुंडे का बयान है और इस पर वही स्पष्टीकरण दे सकते हैं।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि मुंडे ने चुनाव के लगातार बढ़ते खर्च और चुनावों का खर्च सरकार की ओर से उठाए जाने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाकर एक बहस शुरू की है।
पार्टी के एक अन्य प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने मुंडे का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी के सार पर गौर नहीं करना चाहिए, बल्कि हमें बड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने मुंडे की लोकसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की है। पार्टी नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा है कि मुंडे ने चुनाव कानून का उल्लंघन किया है। इसलिए चुनाव आयोग को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
इसके अलावा कांग्रेस सांसद संजय निरूपम ने भी कहा है कि लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार की व्यय सीमा 25 लाख रुपये है।
मुंडे ने उस सीमा से 7.75 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए हैं। इसलिए मुंडे को लोकसभा सदस्यता खत्म के लिए चुनाव आयोग को कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।