सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाली 70 से 80 फीसदी बेटियों में खून की कमी का पता चला है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में यह संख्या 25 से 30 फीसदी है।
डॉक्टरों के मुताबिक बीमारी को लेकर जागरूकता का अभाव और कुपोषण खून की कमी (एनीमिया रोग) के दो बड़े कारण हैं।
सेक्टर 24 स्थित ईएसआई अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आर ऊषा बताती हैं कि करीब 250 मरीजों की प्रतिदिन की ओपीडी में 80 फीसदी में एनीमिया मिलता है।
इनमें 18 से 35 वर्ष की उम्र के मरीजों में 60 फीसदी जबकि इससे कम उम्र की दस फीसदी युवतियां इस बीमारी से पीड़ित हैं।
इन सब में दस फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा छह ग्राम या इससे भी कम है। ऐसी स्थिति में जान पर संकट खड़ा हो सकता है। डॉ. ऊषा का कहना है कि 50 से 60 फीसदी महिला इस बीमारी से अंजान हैं।
जिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निरुपमा सिंह बताती हैं कि करीब 70 फीसदी किशोरी, युवती और महिलाएं एनीमिक पाई जाती हैं। ज्यादातर शारीरिक तौर पर काफी कमजोर होती हैं।
हीमोग्लोबिनः एक स्वस्थ महिला में 11 से 14.5 ग्राम तक हीमोग्लोबिन होना चाहिए।
लक्षणः थकान, दिल की गति तेज होना, हल्का बुखार, सुस्ती, कमजोरी
कारणः कुपोषण, जागरूकता का अभाव, शिक्षित न होना
बचावः खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी-12, फोलिक एसिड का सेवन करें। दाल, दूध और दूध से बने पदार्थ, अंडा, सोयाबीन आदि में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है। वहीं हरी सब्जियों से आयरन मिलता है।
क्या हैं खतरेः गर्भावस्था में यह बीमारी बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। बच्चा प्री मैच्योर पैदा हो सकता है, उसकी संरचना में कमी कमी हो सकती है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
जांच और उपचारः हीमोग्राम टेस्ट। मरीज की यदि किसी प्रकार की सर्जरी नहीं होनी है तो आठ से दस ग्राम हीमोग्लोबिन की स्थिति में रोगी को तीन से छह माह के के लिए आयरन टैबलेट खाने की सलाह दी जाती है। छह ग्राम या इससे कम हीमोग्लोबिन होने पर मरीज को खून चढ़ाना पड़ सकता है।
अमर उजाला निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर
अमर उजाला अगले हफ्ते से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करेगा, जिसमें लड़कियां और महिलाएं निशुल्क जांच करवा सकती हैं। वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा परामर्श की सुविधा भी मिलेगी।