चुनाव आयोग ने ऑनलाइन प्रचार सामग्री पर निगरानी रखने की कवायद शुरू कर दी है। जरूरी दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए आयोग ने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से मदद मांगी है।
मंत्रालय को लिखे पत्र में आयोग ने कहा है कि इसके लिए तकनीकी जानकारी मुहैया कराई जाए, जिससे सोशल साइट्स समेत सारी ऑनलाइन चुनाव प्रचार सामग्री पर नजर रखी जा सके।
दरअसल, चुनावी मौसम में राजनीतिक दल सूचना प्रौद्योगिकी का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे मतदाता, खासकर युवा सीधे तौर पर प्रभावित होता है। वहीं, इसकी पहुंच काफी तेज है। अपलोड होते ही प्रचार सामग्री देश-दुनिया में दिखने लगती है।
पेड न्यूज पर सख्ती
चुनावों के दौरान जिला और राज्य स्तरीय मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनीटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) पेड न्यूज पर नजर रखेगी।
दिल्ली के सभी जिलों में इसका गठन कर लिया गया है। चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राउत ने बताया कि जिला स्तरीय कमेटी के फैसलों के खिलाफ राज्य स्तरीय कमेटी और चुनाव आयोग में अपील की जा सकेगी। इसके बाद अगर साबित होता है कि प्रत्याशी ने खबरों के तौर पर प्रचार करवाया है तो इस पर किया गया खर्च प्रत्याशी के खर्च में जोड़ा जाएगा।