इसे उसकी जिजीविषा और कुदरत का करिश्मा दोनों कह सकते हैं, लेकिन पेम्वा लामा की चलती सांसें राहत एवं बचाव कर्मियों को भी हैरान कर देने वाली रही। पेम्वा ने घी और फर्श पर पोछा लगाने वाले पानी को पीकर खुद को जीवित रखने की कोशिश की और आखिरकार भूकंप की तबाही के करीब 120 घंटे बाद उसे दूसरा जीवन मिल ही गया।
18 वर्षीय पेम्वा लामा गोगवु स्थित सात मंजिला गेस्ट हाउस में बर्तन धोने का काम करता था । उसकी मां तीन साल पहले ही कुवैत चली गई थी। इसके बाद वह काम खोजते हुए काठमांडू आया था। शनिवार को भूकंप आने के दौरान वह गेस्ट हाउस के एक कोने में फंस गया।
जब भूकंप से गेस्ट हाउस हिलने लगा तो वहां अफरा-तफरी मच गई और देखते-देखते वह इमारत भरभराकर गिर गई। इस हादसे में पेम्वा भी मलबे के भीतर दब गया, लेकिन कोने में होने के कारण उसे मलबे के नीचे पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही थी।