अब तक आरक्षण को चुनावी रणनीति के प्रमुख शस्त्रों में शामिल करने वाली कांग्रेस के भीतर से अचानक लोकसभा चुनाव से पहले जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने की आवाज उठने लगी है।
दस जनपथ के करीबी और कांग्रेस के महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव के इस बयान से कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में उथल पुथल मच गई है।
सामाजिक न्याय और जातिवाद में है अंतर
द्विवेदी ने कहा कि जाति के आधार पर आरक्षण अब तक खत्म हो जाना चाहिए था। मगर कुछ निहित स्वार्थी तत्वों के प्रक्रिया में आने के चलते ऐसा नहीं हो पाया।
उनका कहना है कि आरक्षण का लाभ पिछड़े दलित वर्ग की बजाय इस वर्ग के संपन्न लोगों को मिलता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और जातिवाद में अंतर है।
इससे पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा था कि 206 सीटें पाने के बावजूद उनकी पार्टी को 2009 में गठबंधन सरकार नहीं बनानी चाहिए थी, क्योंकि कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए जनादेश मांगा था।
मोदी पर भी किया हमला
द्विवेदी के इस बयान पर पार्टी प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा कि वह यह बात पार्टी फोरम पर भी कई बार कह चुके हैं। कांग्रेस में लोकतंत्र है। उन्हें अपने निजी विचार रखने का अधिकार है। उनकी बात पर पार्टी के भीतर विचार किया जाएगा।
द्विवेदी ने कहा है कि राहुल गांधी पार्टी घोषणा पत्र के लिए जनता से सीधी राय ले रहे हैं। इसलिए वह उनसे मांग कर रहे है कि उन्हें एक बड़ा फैसला करना चाहिए। लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर चर्चा होनी चाहिए। वह कांग्रेस के भविष्य के नेता हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य में देश का नेता वही होगा जो जातपात के बंधन को तोड़ेगा, क्योंकि तब ही समानता के आधार पर समाज का निर्माण हो सकेगा। उन्होंने मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि उस व्यक्ति की बनावट और देश की बनावट बिलकुल अलग है। यह देश के उदार और धर्मनिरपेक्ष है।