लोकपाल तो दूर, लोकपाल का चयन करने के लिए प्रस्तावित पैनल गठित करने को लेकर ही केंद्र सरकार और भाजपा में टकराव शुरू हो गया है।
पैनल के पांचवें सदस्य के तौर पर वरिष्ठ वकील पीपी राव को शामिल करने संबंधी सरकार के प्रस्ताव का भाजपा ने पुरजोर विरोध किया है। लोकसभा में विपक्ष की नेता व पैनल की सदस्य सुषमा स्वराज अब इस मामले को राष्ट्रपति दरबार ले जाएगी।
यह पैनल ही नए लोकपाल की तलाश करने के लिए सर्च कमेटी गठित करेगा। सर्च कमेटी के सुझाए नामों में से किसी एक को लोकपाल बनाने का फैसला यही पैनल करेगा। लेकिन शुरुआत में ही विवाद शुरू हो गया है।
'पीपी राव के नाम पर समर्थन नहीं'
सुषमा ने पैनल में प्रतिष्ठित अधिवक्ता श्रेणी के तहत सरकार के नामित व्यक्ति के तौर पर राव के नाम का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार सुषमा ने राव को कांग्रेस के प्रति वफादार बताते हुए उनके नाम का विरोध किया और पूर्व अटॉर्नी जनरल के परासरन के नाम पर सहमति जताई। लेकिन सरकार सुषमा के सुझाव को मानने के लिए तैयार नहीं हुई।
पांचवें व्यक्ति के तौर पर राव और परासरन के अलावा मोहन गोपाल, सदाशिवम, चंद्रशेखर पिल्लई के नाम भी शामिल थे। दरअसल, पांचवां सदस्य चुनने के लिए सोमवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर हुई बैठक में स्वराज की राय नहीं मानी गई, क्योंकि सरकार के नामित व्यक्ति के पक्ष में तीन वोट थे।
मामले को राष्ट्रपति दरबार लेकर जाएगी भाजपा
सुषमा ने कहा कि अब वे मामले को लेकर राष्ट्रपति से मिलेंगी। इसके लिए राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति से कहेंगी कि सरकार को मनमानी करने से रोका जाए। क्योंकि पहला पैनल बनाने में कोई भी विवाद होने पर जनता के बीच गलत संदेश जाएगा।
सुषमा की दलील थी कि चूंकि देश में पहली बार भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल नियुक्त किया जा रहा है, इसलिए नियुक्तियों पर सर्वसम्मति होनी चाहिए। बहरहाल, चयन पैनल के तीन अन्य सदस्यों प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एचएल दत्तू ने राव की सदस्यता के प्रस्ताव को सहमति दे दी।
न्यायाधीश दत्तू को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम ने नामित किया है। यह दूसरा मौका है जब सरकार और विपक्ष किसी मुख्य पद की नियुक्ति के मसले पर आमने-सामने हैं। इससे पहले नौकरशाह पीजे थॉमस को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त बनाने का भी भाजपा ने विरोध किया था लेकिन सरकार ने यह नियुक्ति कर दी। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद थॉमस को हटा लिया गया।