यूपी के संभल में असमोली थाना पुलिस ने क्षेत्र के सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर गांव में बुधवार को छापेमारी कर नकली (सिंथेटिक) दूध बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यहां से 4200 लीटर तैयार नकली दूध व करीब पचास हजार लीटर नकली दूध बनाने की सामग्री और उपकरण बरामद किए गए हैं। छापेमारी के दौरान आरोपी पिता और दो पुत्र भागने में कामयाब हो गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
असमोली थाना क्षेत्र के सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर गांव में सिंथेटिक दूध बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा था। बुधवार को पुलिस ने गांव में गौहर खां के मकान पर छापेमारी की। यहां से 4200 लीटर सिंथेटिक दूध, 1000 लीटर पनीर का पानी, नौ बोरी ड्राई ग्लूकोज सीरप, 12 किलो सफेद पेस्ट, दो लीटर भूरा तरल पदार्थ, एक डिब्बा बोरिक एसिड, 525 किलोग्राम क्रीम, 880 लीटर रिफाइंड, 50 लीटर ईजी, 10 डिब्बे डिटरजेंट, 150 खाली रिफाइंड कनस्तर, चार पानी की टंकियां, क्रीम मशीन, फैट निकालने की मशीन, तौल मशीन, बीआर मशीन समेत बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दूध बनाने के उपकरण बरामद हुए हैं।
बताते हैं इस सामग्री से करीब 50 हजार लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया जा सकता है। छापेमारी के दौरान गौहर खां, उसके पुत्र तारिक खां और सुहैल खां भागने में कामयाब रहे। बड़े पैमाने पर सिंथेटिक दूध बनाने का खुलासा होने पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी पर एसडीएम सीपी तिवारी, सीओ जगवीर सिंह अत्री, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी कलामुद्दीन, खाद्य सुरक्षा अधिकारी संभल संजय कुमार भारती, खाद्य सुरक्षा अधिकारी मुरादाबाद रवि शर्मा, अभिहित अधिकारी संजय पांडेय भी मौके पर पहुंच गए। बरामद सामग्री के 11 नमूने लिए गए। थानाध्यक्ष केके तिवारी ने बताया कि गौहर खां व उसके दोनों पुत्रों के खिलाफ धारा 272, 273, 420 व खाद्य सुरक्षा मानक अपमिश्रण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
खुलेआम मिलती है नकली दूध की सामग्री
शहर की कई बड़ी दुकानों पर नकली दूध बनाने का सामान खुलेआम बिक रहा है। माल्टा (सफेद पेस्ट) व बोरियों में ग्लूकोज की बिक्री हो रही है। माल्टा यानी सफेद पेस्ट या ये कहिए तैयार नकली दूध, जिसे एक टैंकर में एक लीटर डालने भर से एक टैंकर नकली दूध तैयार हो जाता है। इसे अधिक चिकना व वास्तविक जैसा बनाने के लिए रिफाइंड, हल्की मिठास के लिए ग्लूकोज, झाग के लिए इजी व अन्य डिटरजेंट, कलर के लिए केमिकल्स आदि का प्रयोग किया जाता है। यह सारा सामान खुलेआम शहर की कई बड़ी दुकानों पर बिक रहा है, दुकानदारों को जानकारी है कि क्षेत्र में कौन नकली दूध का कारोबार करता है लेकिन कभी कोई चेकिंग नहीं होती। माल्टा आदि पेस्ट की बिक्री भी कभी रोकने का प्रयास नहीं किया गया।
ऐसे तैयार करते हैं नकली दूध
बड़े बड़े ड्रमों में मात्रा के अनुसार माल्टा मिलाकर सिंथेटिक दूध तैयार कर लिया जाता है, इसमें गर्म किया गया इजी व अन्य डिटरजेंट पाउडर, रिफाइंड आदि डालते हैं, ताकि दूध में भरपूर झाग व चिकनाई बन सके। कुछ मात्रा में वास्तविक दूध व मिल्क क्रीम को भी मिलाते हैं, इसके बाद नकली दूध को पहचानना काफी कठिन होता है। इसके प्रयोग अधिकांशत: पनीर व मिल्क पाउडर बनाने में किया जाता है।
संभल पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना ने बताया कि जिलेभर में नकली दूध कारोबारियों के खिलाफ अभियान शुरू किया जा रहा है। इन्हें पकड़कर संबंधित विभागों को सूचित कर बुलाने के बाद उन्हें कार्रवाई के लिए सौंप दिया जाएगा। सभी थानाध्यक्षों को इस बाबत दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
दूध के नाम पर बिक रहा 'सफेद जहर'
ग्लूकोज, रिफाइंड और वाशिंग पाउडर के मिश्रण में केमिकल डालकर दूध बनाया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह दूध एक तरह से 'स्लो प्वाइजन' है। किडनी और लीवर भी खराब हो सकते हैं। बुधवार को संभल में सिंथेटिक दूध बनाने की जो फैक्ट्री पकड़ी गई है उससे दूध आसपास के जनपदों को भी सप्लाई हो रहा था। अब पुलिस इसका नेटवर्क तलाशने में लगी है।
सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। हालांकि दूध में पानी, मिल्क पाउडर या फिर गाढ़ा करने वाले केमिकल के मामले तो सामने आते रहे हैं लेकिन बुधवार को संभल जनपद में सिंथेटिक दूध बनाने का बड़ा कारखाना पकड़े जाने का हड़कंप दूर तक है। यह कारखाना पकड़ा भले ही आज गया है मगर अरसे से दूध में मिलावट का काला कारोबार चल रहा था।
यहां से दूध की सप्लाई मुरादाबाद और अमरोहा के साथ ही प्रदेश के कई जनपदों को हो रही थी। हालांकि हकीकत तो मिलावट खोरों की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगी लेकिन अभी तक जो जानकारी पुलिस को लगी है उसके अनुसार दूध की बिक्री बाकायदा पूरा चैनल बनाकर की जा रही थी।
पांच साल पहले चर्बी से घी बनाते पकड़ा गया था परिवार
पांच साल पहले असमोली के सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर गांव में ही नकली दूध बनाने के आरोपी गौहर खां के परिवार के लोगों को नकली घी बनाते भी पकड़ा गया था। असमोली पुलिस ने गौहर खां के परिवार के अताबुल के घर से मृत पशुओं की निष्प्रयोज्य चर्बी से नकली घी बनाते पकड़ा था। यहां से छह ड्रम व एक टाटा मैक्स भर नकली घी बरामद किया गया था, जिसके ड्रम आज भी असमोली थाने में पड़े हैं, जिसका कोई निराकरण नहीं हो सका है। परिणाम यह हुआ कि यह पूरा परिवार ही नकली घी और दूध बनाने में वर्षों से जुटा हुआ है।
पांच सालों से कर रहा था नकली दूध का कारोबार
हाजीपुर में गौहर खां का परिवार पिछले पांच सालों से सिंथेटिक दूध बनाने का कारोबार कर रहा था। संभल मुरादाबाद अमरोहा जिले की कई डेयरियों व पनीर फैक्ट्रियों को सिंथेटिक दूध सप्लाई किया जा रहा था।
संभल क्षेत्र में हाजीपुर के आसपास संभल व अमरोहा जिले के गांवों में बड़ी संख्या में पनीर बनाने की फैक्ट्रियां संचालित की जा रही है। मौके पर ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार हाजीपुर में रोजाना करीब 25 से 50 हजार लीटर दूध तैयार किया जा रहा था। कोई शक ने करे, इसके लिए गौहर खां हाजीपुर व आसपास के गांवों के कुछ दूधियों व पशुपालकों से दूध भी खरीदता था, एक छोटी डेयरी उसने हाजीपुर बस अड्डे पर भी खोल रखी थी।
संभल के डिप्टी सीएमओ डा.कप्तान सिंह यादव ने कहा कि सिंथेटिक, नकली दूध में जो केमिकल्स मिलाना बताया गया है, उनसे किडनी, लीवर, हार्ट सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, स्नायु को डैमेज करता है, बोरिक एसिड जैसे केमिकल्स तो आंखों की आप्टिक नर्ब को डैमेज करता है, जिससे लोगों की आंखों की रोशनी कम हो सकती है, अंधा भी हो सकता है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
तेरह रुपये में बन रहा एक लीटर दूध
ग्लूकोज, रिफाइंड, डिटर्जेंट और सफेद केमिकल मिलाकर जो दूध बनाया जा रहा है उस पर प्रति लीटर तेरह रुपये की लागत आ रही है। जबकि इस दूध की बिक्री पैंतीस से चालीस रुपये प्रति लीटर के हिसाब से की जा रही है। अब जरा सोचिए कि सफेद दूध के नाम पर चल रहे इस काले कारोबार से माफिया कितना मुनाफा कमा रहे होंगे।
संभल ही नहीं मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर और बिजनौर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में नकली दूध तैयार किया जा रहा है। यहां दूध बनाने के ऐसे कारखाने खुल गए हैं जहां कभी दूध की किल्लत नहीं होती। यही वजह है कि प्रदेश में दुधारू पशुओं की संख्या लगातार कम होने के बाद भी दूध कम नहीं हो रहा है। जितना चाहिए उतना मिलेगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रदेश को कोई कामधेनु मिल गई हो। अगर कामधेनु नहीं है तो फिर सोचने वाली बात यह है कि इतना दूध आता कहां से है। मांग तो हर रोज बढ़ रही है लेकिन उत्पादन घट रहा है।
मंडलीय खाद्य अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि केमिकल के साथ जो रिफाइंड या डिटर्जेंट मिलाया जा रहा है वह बहुत ज्यादा महंगा तो होता नहीं है। सारा मिलाकर एक लीटर नकली दूध तेरह रुपये में तैयार हो रहा है। जबकि इसे पैंतीस से चालीस रुपये लीटर के हिसाब से बेचा जाता है। नकली दूध बनाने वाले माफियाओं का नेटवर्क प्रदेश के कई जिलों तक फैला है।