नेताजी सुभाषचंद्र बोस के ड्राइवर रह चुके प्रीतम सिंह उर्फ स्वामी परमानंद की मुजफ्फरनगर के शुक्रताल में गुमनाम मौत हो चुकी है। इंडियन मिलिट्री के सिपाही प्रीतम ने कई देशों में नेताजी की गाड़ी चलाई थी। नेताजी के पांच ड्राइवरों में वह अकेले जीवित थे। प्रीतम के पास नेताजी के रहस्यों से जुड़े तमाम दस्तावेज थे।
नेताजी की मौत आज तक मिस्ट्री बनी हुई है। इसी तरह उनके ड्राइवर प्रीतम सिंह की 104 वर्ष की उम्र में मौत की किसी को भनक नहीं लगी। नेताजी की जयंती पर ‘अमर उजाला’ ने उनकी टोह ली तो पता चला कि बोस के सहयोगी की दो माह पहले मौत हो चुकी है। मेरठ जनपद के गांव जैनपुर में किसान काले सिंह के घर में जन्मे प्रीतम सिंह वर्ष 1932 में सेना में भर्ती हुए थे। दो साल बाद उन्हें इटली भेज दिया गया। वहीं, उनकी नेताजी से पहली भेंट हुई। सेना के कर्नल रामबीर सिंह (रोहतक) से सुभाष चंद्र बोस ने ड्राइवर की आवश्यकता बताई, तो प्रीतम को नेताजी की सेवा में भेज दिया गया। इराक, ईरान, रूस, जापान आदि कई देशों की यात्राओं के दौरान वह नेताजी के साथ रहे थे। प्रीतम नेताजी के पांच ड्राइवरों में अंतिम जीवित थे।
17 साल पहले प्रीतम सिंह ने शुकतीर्थ में गोरक्षक आश्रम बनाया और स्वामी परमानंद बन गए। देशभक्ति की जीवटता के साथ उन्होंने खुद को सत्संग और सेवा में रमा लिया। हालांकि उनका दावा था कि नेताजी की मृत्यु विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी। उनके शिष्य स्वामी प्रेमानंद ने बताया कि 27 नवंबर को उनकी मृत्यु हो गई थी। अगले दिन शुक्रताल में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि बोस की मौत की गुत्थी को लेकर मोदी सरकार के सामने अनगिनत सवाल हैं। पहले नेताजी के परिजनों ने मृत्यु की गुप्त फाइलें सार्वजनिक करने की बात रखी तो हाल ही में भाजपा नेता सुब्रह्मणयम स्वामी ने कोलकाता में स्टालिन द्वारा नेताजी की हत्या किए जाने का सनसनीखेज बयान दिया था।