जल, जंगल और जमीन पर मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे देश के दो करोड़ से अधिक भूमिहीन आदिवासियों व किसानों के लिए सरकार ने कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश की अध्यक्षता वाले कार्यदल ने बुधवार को पहली बैठक करके जमीन, आवास और अदालतों के गठन सहित पांच मुद्दों पर कार्य करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाया है। कार्यदल ने राष्ट्रीय भूमि सुधार नीति का मसौदा तैयार करने के लिए तीन महीने की समयसीमा निर्धारित की है।
जयराम ने बताया कि कार्यदल पांच प्रमुख मुद्दों पर कार्य करेगा। इसमें राष्ट्रीय भूमि सुधार नीति, कृषि भूमि एवं वास भूमि के वैधानिक अधिकार, वासभूमि, गरीबों, सीमांत और वंचित भूमिहीनों के लिए भूमि की उपलब्धता एवं भूमि अधिकारों में बढ़ोतरी के साथ ही फास्ट ट्रैक भूमि न्यायाधिकरण आदि हैं। रमेश के मुताबिक बेघर लोगों को घर उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा इंदिरा आवास योजना में भी बदलाव किया जाएगा। इसके तहत इंदिरा आवास के लिए सरकार की ओर से दिए जाने वाली सहायता राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी जाएगी।
जयराम ने बताया कि दरअसल भूमि से संबंधित मामले मुख्य रूप से राज्यों का विषय है। इसलिए राष्ट्रीय भूमि सुधार नीति पर राज्यों से बात की जाएगी। ताकि इस पर मजबूत कानून बनाया जा सके। जयराम के मुताबिक उनकी अध्यक्षता वाले कार्यदल में पंचायती राज, आदिवासी मामलों, भूमि संसाधन विभाग के सचिवों के अलावा योजना आयोग के मिहिर शाह, एकता परिषद के पीवी राजगोपाल, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय, शिक्षाविद प्रवीन झा, अर्थशास्त्री बीना अग्रवाल, भूमि से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ देवु बंदोपाध्याय और योजना आयोग के पूर्व सदस्य वी एन युगांता शामिल हैं। कार्यदल की अगली बैठक 16 नवंबर को होगी।