17वीं और 18वीं शताब्दी के पोलैंड में लोग पिशाचों से इस कदर डरा करते थे कि अपने घर के दरवाजे बंद कर लेते थे।
यही नहीं कुछ लाशों की गर्दन में हंसिया या फिर जबड़ों में पत्थर रखकर दफनाया जाता था। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकी ये लाशें कब्र से बाहर निकलकर लोगों पर हमले न करें।
विज्ञान पर भरोसा करने वाले यूरोप के इस देश में यह मान्यता काफी मजबूत थी। लिखित दस्तावेजों के मुताबिक, ये मौतें इसलिए भी अशुभ मानी जाती थीं, क्योंकि मरने वाले अप्रवासी हुआ करते थे। हालांकि नया अध्ययन इस तर्क को खारिज करता है।