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डीएमके ने छोड़ा यूपीए सरकार का साथ

Tue, 19 Mar 2013 10:21 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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श्रीलंकाई तमिलों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने के मुद्दे पर यूपीए के घटक दल द्रमुक ने मंगलवार को सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी।
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इसके साथ ही यूपीए सरकार ‘नंबर गेम’ के सियासी संकट में घिर गई। हालांकि हमेशा की तरह समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सरकार की संकटमोचक बनीं और उन्होंने सरकार को बाहर से समर्थन जारी रखने की बात कही।

द्रमुक ने यूपीए से अपना नौ साल पुराना नाता तोड़ने के साथ केंद्र से अपने मंत्रियों को हटाने का भी फैसला किया है। उसके मंत्री बुधवार को इस्तीफा दे सकते हैं।
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केंद्र सरकार को कोई खतरा नहीं: चिदंबरम

द्रमुक प्रमुख करुणानिधि ने यूपीए को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रस्ताव में संशोधन लाने के साथ संसद में भी श्रीलंकाई तमिलों पर अत्यचार के खिलाफ प्रस्ताव लाने का अल्टीमेटम देते हुए यह ऐलान किया। द्रमुक ने सरकार को अपनी दोनों शर्तों के लिए तीन दिन की मोहलत दी।

करुणानिधि के ऐलान से हिली सरकार ने दावा किया है कि यूपीए को बहुमत हासिल है। लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार ने द्रमुक को मनाने के लिए प्रस्ताव के मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है।

यूपीए के रणनीतिकार इसके लिए विपक्ष को भी मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बैक चैनल डिप्लोमेसी के जरिए श्रीलंका पर अमेरिकी प्रस्ताव में मध्यमार्गी संशोधन की राह तलाशी जा रही है।

फिर माया, मुलायम के भरोसे यूपीए सरकार

केंद्र सरकार से द्रमुक का हटाना इसलिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि यूपीए में कांग्रेस के बाद द्रमुक के लोकसभा में सबसे ज्यादा 18 सांसद हैं।

यूपीए सरकार में द्रमुक के एक कैबिनेट समेत पांच मंत्री हैं। द्रमुक के ऐलान के बाद यूपीए के पास अब 233 सांसद है, जबकि सपा, बसपा, राजद और जेडीएस के 50 सांसदों का बाहर से समर्थन मिल रहा है।

इस तरह सरकार के पास द्रमुक के अलावा बहुमत के लिए जरूरी 271 सांसदों की संख्या से कुछ अधिक सदस्य (233+50=283) हैं। सत्ताबल के लिए जरूरी आंकड़ों बावजूद द्रमुक के अलग होने से सरकार की राजनीतिक साख पर गहरे सवाल तो खड़ा हो ही गए हैं।

इससे पहले करुणानिधि ने चेन्नई में अपने मंत्रियों को हटाने का ऐलान करते हुए यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उसने श्रीलंका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में पेश होने वाले प्रस्ताव को मजबूत करने के लिए द्रमुक के सुझाए संशोधनों पर विचार तक नहीं किया।

उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार में बने रहने का क्या मतलब जिसमें तमिल ईलम के लोगों को कोई फायदा नहीं मिले।

हालांकि करुणानिधि ने यूपीए में वापसी का रास्ता यह कहते हुए खुला रखा कि अगर सरकार 21 मार्च से पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश होने वाले अमेरिका समर्थित प्रस्ताव में उनके सुझाए दो संशोधनों को शामिल करने के प्रस्ताव को पारित करती है तो वह अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
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द्रमुक के फैसले से मचे हड़कंप के बावजूद संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सरकार तमिल मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
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