मंत्रिमंडल फेरबदल के बीच यूपीए की एक महत्वपूर्ण सहयोगी डीएमके ने प्रधानमंत्री की ओर से दी गई दो मंत्री पदों की पेशकश को ठुकरा दिया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बाद अब डीएमके ने भी सरकार की चिंता बढ़ा दी है। रिटेल में एफडीआई, डीजल और सिलिंडर सब्सिडी पर सरकार के फैसलों पर नाराज डीएमके यूपीए-2 में अब सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है। तृणमूल के 19 सासंदो के बाद डीएमके के सबसे अधिक 18 सासंद हैं।
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक प्रधानमंत्री ने यह पेशकश रखने का काम पीएमओ में राज्यमंत्री वी नारायणसामी को सौंपा था। नारायणसामी ने डीएमके प्रमुख करूणानिधि से चेन्नै में सीटीसी कॉलोनी स्थिति उनके आवास पर करीब आधे घंटे तक मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने करूणानिधि को पीएम के प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी।
डीएमके के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक करूणानिधि ने प्रधानमंत्री की इस पेशकश को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें कैबिनेट में अपना कोटा बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं है। उनके कुछ सांसदों की इस ऑफर में रूचि होने के बावजूद भी करूणानिधि ने अलग राय रखी। उनके मुताबिक वह सरकार के स्थायित्व के बारे में सोच रहे हैं। इस वजह से उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया है। पार्टी के एक सांसद का यह भी कहना है कि यूपीए की पेशकश को अपनाने से राज्य में पार्टी की छवि खराब होगी और अन्य पार्टियों का हमला तेज हो जाएगा।
डीएमके के एक पूर्व मंत्री का कहना है कि हमारे कई जिला सचिव कांग्रेस के साथ गठबंधन का विरोध कर रहे हैं। वे कांग्रेस से दूरी बनाने को लेकर डीएमके प्रमुख के समक्ष अपनी राय भी जाहिर करते रहे हैं। उनके मुताबिक डीजल के दाम में बढ़ोतरी, एलपीजी सिलिंडर पर सब्सिडी सीमित करने और कई अन्य जन विरोधी नीतियों के खिलाफ पार्टी में गुस्सा है। हालांकी पार्टी ने अगले आम चुनावों में यूपीए के साथ गठबंधन को लेकर विकल्प भी खुले रखे हैं।
ध्यान हो कि यूपीए-2 में डीएमके के पास तीन केंद्रीय मंत्री और चार राज्यमंत्री पद थे। 2जी घोटाले में नाम आने से ए राजा और दयानिधि मारन के इस्तीफा देने के बाद अब केवल एमके अलागिरी ही मंत्रिमंडल में रह गए हैं।