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महाराष्ट्र में सियासी संकट, निर्दलीय अजीत पवार के साथ

Wed, 26 Sep 2012 11:48 AM IST
मुंबई/एजेंसी/इंटरनेट डेस्क
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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे से प्रदेश सरकार का संकट और गहरा गया है। निर्दलीय विधायक दिलीप सोबल ने दावा किया है कि अजीत पवार को 12 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है। सोबल ने कहा है कि यदि अजीत पवार सरकार में नहीं रहेंगे तो निर्दलीय विधायक कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार को समर्थन नहीं करेंगे।
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उल्लेखनीय है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 61 और कांग्रेस के 82 विधायक हैं। शिवसेना के 45 और भाजपा के 47 विधायक हैं।

इससे पहले हजारों करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोपों में घिरे महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे से राज्य में सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल एनसीपी के अन्य सभी 20 मंत्रियों ने भी कांग्रेस पर दबाव बनाते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। एनसीपी के मंत्रियों ने कांग्रेस के साथ चल रही गठबंधन सरकार से हटने की मांग भी पार्टी नेतृत्व के सामने बुलंद कर दी है।
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एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के इस्तीफे के साथ ही 13 साल पुराने एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन में तनाव बढ़ गया है। एनसीपी का मानना है कि अजीत और एनसीपी के अन्य नेताओं के खिलाफ लगने वाले आरोपों में कहीं न कहीं कांग्रेस का हाथ है।

हालांकि शरद पवार ने गठबंधन से हटने की बात को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार को अस्थिर करने और अजीत के अलावा किसी अन्य के इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं है। इससे पहले अजीत ने कहा कि मैंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि जब तक एनसीपी विधायकों का समर्थन उन्हें हासिल है, वह पार्टी विधायक दल के नेता बने रहेंगे।

पृथ्वीराज चव्हाण सरकार में वित्त और बिजली विभाग संभाल चुके अजीत ने कहा कि मैं मामले की सीबीआई जांच के लिए भी तैयार हूं। जब तक मैं आरोपों से पाक साफ होकर नहीं निकलता, तब तक कोई पद नहीं संभालूंगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने यह भी कहा कि लोग एनसीपी की तरक्की से जल रहे हैं।

इसके बाद पार्टी से सभी अन्य 20 मंत्रियों ने भी अपने इस्तीफे एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष मधुकर पिचड को सौंप दिए हैं। उनकी मांग है कि एनसीपी को गठबंधन से हट जाना चाहिए। पिचड ने कहा कि इस मुद्दे पर बुधवार को दो बजे एनसीपी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें कोई फैसला किया जाएगा।

वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पार्टी पूरी तरह अजीत पवार के साथ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चव्हाण को सिंचाई घोटाले पर जल्द से जल्द श्वेत पत्र लाना चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

पवारों की पावर पॉलिटिक्स
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अजीत पवार का इस्तीफा पवारों की पावर पॉलिटिक्स का नतीजा है। कहा जा रहा है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं, इसलिए अजीत को पद से हटाया गया है। लेकिन अजीत को एनसीपी के कई विधायकों का समर्थन हासिल है।

क्या हैं आरोप
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 1999 से 2009 के बीच जल संसाधन मंत्री रहे अजीत पवार ने वर्ष 2009 में 20 हजार करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जबकि इसके लिए विदर्भ सिंचाई विकास निगम की गवर्निंग काउंसिल से जरूरी क्लीयरेंस भी नहीं लिया गया।
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