मिस इंडिया व्हीलचेयर बनने वाली दिल्ली की दिव्या अरोरा ने अपनी शारीरिक अक्षमता को अपने हौसलों की उड़ान के कभी आड़े नहीं आने दिया। छोटी उम्र से ही वो कई बाधाओं को पार करते हुए आगे निकलती गईं।
दरअसल दिव्या जन्म से ही सेरिब्रल पॉल्सी से पीड़ित हैं। ये एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें पीड़ित का मस्तिष्क उसके बाकी अंगों से सुचारू रूप से सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं कर पाता जिससे शरीर के अंगों को जैसे हाथ-पैर को हिलाने डुलाने में मरीज़ अक्षम होता है।
दिव्या पिछले पांच साल से मुंबई में हैं और एक फ़िल्म निर्देशक बनना चाहती हैं। वो एक कहानी लिख चुकी हैं और उसी पर फ़िल्म बनाना चाहती हैं।
दिव्या इससे पहले 80 के दशक में बनी 'शिवा का इंसाफ़' में बतौर बाल कलाकार और साल 2011 में आई अनुराग कश्यप की 'शैतान' में दिख चुकी हैं। दिव्या ने 24 नवंबर 2013 में मुंबई में हुई मिस इंडिया व्हीलचेयर प्रतियोगिता जीती और वो ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला हैं।
बीबीसी से बात करते हुए दिव्या कहती हैं, "मैं बचपन से ही व्हीलचेयर पर हूं। डॉक्टरों के मुताबिक़ आगे भी मेरी हालत ऐसी ही रहेगी। लेकिन मुझे कोई ग़म नहीं क्योंकि मेरा हौसला, मेरी इच्छा शक्ति मेरे साथ है।"
पढ़ाई में भी अव्वल थीं दिव्या
दिव्या को बचपन में काफी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा। आज भले ही वो आर्थिक दृष्टि से संतोषजनक हालत में हैं लेकिन पहले ऐसा नहीं था।
वो कहती हैं, "मेरी भी आम बच्चों की तरह ख़्वाहिशें थीं। मैं खेलना चाहती थी। मौज-मस्ती करना चाहती थी लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सकती थी।"
"भारत में सेरिब्रल पॉल्सी को लेकर जागरुकता भी बहुत कम है। मेरा आईक्यू स्तर सामान्य बच्चों की तरह था। मैं इसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहती थी। इसलिए मैंने पढ़ाई करने का फ़ैसला किया।"
दिव्या ने बताया कि उन्होंने तय कर लिया कि वो अपनी शारीरिक अक्षमता को आड़े नहीं आने देंगी और उन्होंने ज़िंदगी को उत्साह के साथ जीने का फ़ैसला किया।
दिव्या ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की और वो अपने बैच में टॉपर रहीं। वो कहती हैं, "मुझे कभी भी नंबर दो पोज़ीशन पसंद नहीं रही। मेरा यही मानना था कि जो भी करो उसमें अव्वल नंबर रहो।"
दिव्या कर चुकी हैं 'ग़ुज़ारिश' में काम
संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'ग़ुज़ारिश' में ऋतिक रोशन ने भी ऐसी ही एक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का किरदार निभाया जिसके लिए दिव्या ने ही उन्हें ट्रेनिंग दी।
इसके पीछे की कहानी बताते हुए दिव्या कहती हैं, "मैंने संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ब्लैक देखी जिसमें रानी मुखर्जी ने नेत्रहीन, मूक और बधिर लड़की की भूमिका निभाई है। चूंकि मैं एक डिसेबिल्ड एक्टिविस्ट हूं तो इस नाते मुझे कई बातें फ़िल्म में पसंद नहीं आईं जो मैंने संजय लीला भंसाली को फ़ोन करके बताईं। उन्हें मेरे सुझाव अच्छे लगे और हम धीरे-धीरे दोस्त बन गए। इसलिए जब वो ग़ुजारिश बना रहे थे तो बतौर सलाहकार उन्होंने मुझे फ़िल्म में मौक़ा दिया।"
ऋतिक रोशन के बारे में दिव्या ने बताया, "वो बेहतरीन स्टूडेंट हैं। ग़ुज़ारिश की शूटिंग के दौरान वो हमेशा मेरे साथ ही रहते थे। मैं कैसे बात करती हू, मेरे हाव-भाव सब उन्होंने नोटिस किए और पर्दे पर उन्हें बेहतरीन तरीक़े से उतारा।"
'ना क्रेडिट मिला ना पैसा'
दिव्या ने बताया कि इस सबके बावजूद उन्हें इस बात का अफ़सोस है कि 'ग़ुज़ारिश' के क्रेडिट रोल में भी उनका नाम नहीं था और ना ही उन्हें इसके लिए कोई मेहनताना दिया गया।
फिर भी दिव्या को मुंबई शहर रास आ रहा है। वो कहती हैं, "मैं मुंबई से इश्क़ करने लगी हूं। पिछले पांच साल से यही रह रही हूं। यहां लोगों के दिल में जो बात होती है वही ज़ुबां पर होती है। दिल्ली की तुलना में मुंबई ज़्यादा पसंद आ रहा है।"
दिव्या अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानती हैं। फ़िलहाल उनका फ़ोकस उनकी वो फ़िल्म है जिसे वो बनाना चाहती हैं। उन्होंने इसका शीर्षक 'प्यार एक्चुअली' रखा है। कहानी ख़ुद लिखी है और वो इसका निर्देशन भी करना चाहती हैं। दिव्या के शब्दों में, "अब फ़िल्में ही मेरी ज़िंदगी है।"