सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र पर बहस छिड़ गई है। महिला सुरक्षा संबंधी आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2013 के मसौदे में ‘कंसेंट एज’ या सहमति से सेक्स करने की उम्र को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष कर दिया गया है। एक महीने पहले दुष्कर्म विरोधी अध्यादेश के जरिए इसे 18 वर्ष किया गया था।
योगगुरु बाबा राम देव और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल ने सरकार के इस फैसले का कडा़ विरोध किया है।
बाबा रामदेव ने कहा है कि सेक्स करने की उम्र कम करने से बलात्कार के मामले बढ़ेंगे। अशोक सिंघल ने कहा कि सहमति से संबंध बनाने की उम्र कम करने से बच्चों का व्यवहार जानवरों के समान हो जाएगा।
समाजवादी पार्टी ने भी आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2013 का विरोध किया है। पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने शुक्रवार को कहा कि यदि विधेयक पर संसद में मतदान की नौबत आती है तो वह इसके खिलाफ वोट करेगी।
रामगोपाल यादव के मुताबिक, यह विधेयक दिमागी रूप से कुछ पंगु लोगों की सिफारिश पर तैयार किया गया है। सपा सहमति से सेक्स की उम्र कम करने का विरोध तो कर ही रही है, विधेयक कई और प्रावधान भी पार्टी को रास नहीं आ रहे हैं।
पार्टी का मानना है कि ये बिल पास होगा तो महिलाओं के लिए ही नहीं, पुरुषों के लिए भी समस्याएं खड़ी होंगी।
सहमति से सेक्स की उम्र
वैसे 16 की उम्र में सेक्स पर छिड़ा हंगामा गलतफहमियों का भी नतीजा है। दरअसल भारत में 1983 से ही सेक्स की ‘कंसेंट एज’ 16 वर्ष रही है। चार महीने पहले केंद्र सरकार ने ‘प्रिवेंशन ऑफ चाइल्ड सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट’ के जरिए इसे बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया था।
केंद्र सरकार ने एक महीने पहले लागू किए गए बलात्कार विरोधी अध्यादेश में भी इसे 18 वर्ष ही रखा। सहमति से सेक्स की उम्र बढ़ाने से भारत की गणना पुरातनपंथी देशों में होने लगी थी।
ब्रिटेन में सहमति से सेक्स की उम्र 16, फ्रांस में 15 और स्पेन में 13 वर्ष है। अमेरिका में यह 16 से 18 वर्ष के बीच है। भारत में कई महिला संगठन ‘कसेंट एज’ 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की मांग कर रहे थे।
16 की उम्र में सेक्स ठीक
पिछले कुछ वर्ष मे भारतीय समाज में आए खुलेपन, मीडिया और फिल्मों के प्रभाव के कारण युवाओं विशेषकर किशोरों मे सेक्स की प्रवृत्ति बढ़ी है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 से 24 साल की उम्र में प्यार करने वाले लड़के-लड़कियों में से 42 फीसदी लड़कों और 26 फीसदी लड़कियों ने अपने साथी के साथ सेक्स किया होता है।
आज इंटरनेट और टीवी चैनलों के कारण युवाओं को सेक्स के बारे में जानकारियां पहले की अपेक्षा ज्यादा आसानी से मिल रही हैं। यही वजह है कि 18 की उम्र के पहले ही युवाओं में सेक्स का चलन बढ़ा है।
सहमति से सेक्स की उम्र कम करने का मकसद यौन अपराधों पर लगाम लगाना है। उम्र कम करने के पीछे एक समझ प्रेमी जोड़ों के खिलाफ होने वाले अपराधों को भी रोकना है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रसंध अध्यक्ष व छात्र संगठन आइसा की सदस्य सुचेता के मुताबिक, ‘कंसेंट ऐज’ कम कराने के पीछे हमारे मकसद सेक्स करने का लाइसेंस देना या इसे बढ़ाना नहीं है। हम चाहते हैं कि 16 से 18 की उम्र के बीच सेक्स करने वालों को क्रिमिनल ना माना जाए।
सुचेता कहती हैं, ‘16 से 18 उम्र में किशोर उम्र कारण लड़के-लड़कियां सेक्स की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इस उम्र में सेक्स को यदि अपराध बना दिया जाएगा तो खाफ पंचायतों या परिवार द्वारा लड़के-लड़कियों को प्रताडि़त करने की घटनाएं बढ़ जाएंगी।’
क्या है मनोविशेषज्ञ की राय
16 की उम्र की तक सेक्स करने के लिए शरीर परिपक्व होता है लेकिन क्या मन भी परिपक्व होता है?
इस बाबत काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रीता कुमार कहती हैं, ‘16 से 18 वर्ष तक की उम्र तक आम तौर पर ‘प्यूबर्टी’ का पीरियड खत्म हो चुका होता है। इसलिए लड़के-लड़कियां शारीरिक रूप से सेक्स में सक्षम होते हैं। लेकिन इन मामलों में आम तौर पर वे अनसेफ सेक्स करते हैं और ऐसे में गर्भधारण जैसी स्थिति बनती है तो परिवार बनाने या चलाने मे सक्षम नहीं होते ऐसे स्थिति में समस्या खत्म होने के बजाय बढ़ जाती है।’
रीता कुमार के मुताबिक 16 की उम्र में सेक्स को बढ़ावा देने के पहले इसके सामाजिक और नैतिक परिणामों के बारे में भी सोचा जाना चाहिए।