कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना तालिबान से करते हुए कहा कि दोनों रूढ़िवादी हैं और हमें 18वीं सदी में ले जाना चाहते हैं। वे यहां एक सभा को संबोधित करने के बाद रविवार रात को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान के संदर्भ में दिया जिसमें उन्होंने यह कहा था कि विवाह एक सामाजिक समझौता है जिसमें पुरुष बाहर जाकर काम करते हैं जबकि महिलाएं घर संभालती हैं।
आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि केवल रूढ़िवादी ही महिलाओं के लिए ड्रेस कोड लागू करना चाहते हैं ताकि ऐसा करके वे अपने दुर्व्यवहार को छिपा सकें। आरएसएस महिलाओं के जींस, कंप्यूटर और मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाना चाहता है। यदि आरएसएस को भारतीय संस्कृति का इतना ही शौक है तो उनके स्वयंसेवक पश्चिमी जगत से आई हाफ पैंट क्यों पहनते हैं। बेहतर होगा कि वे धोती पहनना शुरू कर दें।
दिग्विजय ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि जिस घर में महिलाओं का सम्मान होता है वहां खुशहाली रहती है और जिस घर में उनका सम्मान नहीं होता वहां कोई खुशी नहीं हो सकती। मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान कि महिलाओं को लक्ष्मण रेखा का सम्मान करना चाहिए, का कड़ा विरोध करते हुए सिंह ने कहा कि यदि वे मुख्यमंत्री होते तो विजयवर्गीय को मंत्रिमंडल से बाहर कर देते। विजयवर्गीय ने न केवल नारी जाति का बल्कि भगवान राम और सीता का भी अपमान किया है।