सजायाफ्ता सांसद और विधायकों को बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश पर राहुल गांधी के बयान पर राजनैतिक हलकों में तो हंगामा हुआ ही, मीडिया में भी ये बयान चर्चा में रहा।
शुक्रवार को प्रेस क्लब में राहुल गांधी ने दागी सांसदों और विधायकों को बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को बकवास करार दिया। उन्होंने कहा कि इसे फाड़ कर फेंक देना चाहिए।
उनके बयान को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अथॉरिटी में हस्तक्षेप माना गया तो कई अखबारों ने इसे राहुल गांधी का नया अवतार कहा।
पढ़िए, अलग-अलग अखबारों का राहुल के मुद्दे पर विश्लेषण
दैनिक हिंदुस्तान, हेडिंग - शुद्धीकरण की शुरुआत
राहुल गांधी के इस बयान को दैनिक हिंदुस्तान ने पूरे पृष्ठ पर एक बदलाव के तौर पर पाठकों के सामने पेश किया है। हिंदुस्तान ने राहुल गांधी के इस बयान को शुद्धीकरण की शुरुआत बताया है। राहुल की एंट्री से लेकर बयान के बाद अचानक चले जाने तक का जिक्र किया है।
इसके अलावा राहुल गांधी की प्रधानमंत्री के नाम चिट्ठी और प्रधानमंत्री और सोनिया के बीच बातचीत को पेश किया है। इसके साथ ही राहुल के इस बयान का विश्लेषण करते हुए इसे राहुल के एजेंडे का नाम दिया है।
हिंदुस्तान ने इस अध्यादेश को राहुल गांधी की गैर-रजामंदी के तैयार किया अध्यादेश बताया, जो राहुल के राजनैतिक शुद्धीकरण के प्रयास में पहला कदम बताया।
दैनिक जागरण
दैनिक जागरण ने राहुल गांधी के बयान को ही अपने अखबार की हेडिंग बनाकर इस्तेमाल किया है। जागरण ने इसे राहुल का अपनी सरकार पर ही सीधा हमला बताया है। जागरण ने राहुल के इस बयान को उनके और उनकी सरकार के बीच के मतभेदों के तौर पर पेश किया है।
दैनिक भास्कर
दैनिक भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट के राइट टू रिजेक्ट और राहुल के बयान को बड़े फैसले के तौर पर रखा है। इसके साथ ही भास्कर ने राहुल गांधी के बयान को एक राजनैतिक ड्रामा के तौर पर देखते हुए मंगलवार से लेकर शुक्रवार तक पार्टी और सरकार के बड़े नेताओं के बयानों को रखा।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के बदलते सुरों को भी सामने रखा और इस बयान के बाद पार्टी के बदलते रूख को भी पाठकों के सामने रखा।
टाइम्स आफ इंडिया
अंग्रेजी अखबार टाइम्स आफ इंडिया ने राहुल गांधी के इस बयान को सरकार के लिए शर्म बताया है। टाइम्स ने इसे प्रधानमंत्री के लिए एक शर्म के तौर के पेश किया है।
प्रधानमंत्री और कैबिनेट के फैसले के बाद राहुल गांधी का अध्यादेश पर ये बयान सरकार और कैबिनेट के फैसले पर सवाल उठाता है।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से पहले इस राजनैतिक हाईवोल्टेज ड्रामा को अपमान के तौर पर देखा है। टाइम्स ने राहुल गांधी के अचानक आए इस बयान पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स
हिंदुस्तान टाइम्स ने राहुल गांधी के इस को सरकार के लिए मुसीबत बताया। अखबार के मुताबिक ये सरकार के उपर राहुल गांधी का एक बम है।
इस बयान के बाद मनमोहन सिंह की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ होने वाली वार्ता पर पड़ने वाले प्रभाव को भी विश्लेषित किया