संभल शहर के मुहल्ला महमूद खां सराय में ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में चलाए गए ब्लोअर ने एक नमकीन व्यापारी की जान ले ली। जबकि उसकी पत्नी और मासूम बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह बालक के रोने की आवाज से पड़ोसी पहुंचे। दरवाजा नहीं खुलने पर तोड़कर तीनों को निकाला। अचेतावस्था में अस्पताल ले गए लेकिन युवक की मौत हो गई। पत्नी व बच्चे को बचा लिया गया।
शहर के मुहल्ला महमूद खां सराय निवासी नमकीन-बिस्किट होल सेलर गौरी शंकर उर्फ गौरव (28) पुत्र स्वर्गीय सुरेशचंद्र की शादी डेढ़ साल पहले कासगंज की रेखा के साथ हुई थी। दो जनवरी को रेखा ने एक पुत्र केशव को जन्म दिया। बुधवार रात करीब नौ बजे गौरव अपनी दुकान बंद करके घर पहुंचे। कड़ाके की सर्दी थी, जिससे अपने लाड़ले को बचाने के लिए दंपति ने अपने कमरे में लगा छोटा रोशनदान भी पन्नी लगाकर बंद कर दिया, जिससे ठंडी हवा न आए। केशव की तबियत पहले से ही कुछ खराब थी, इसलिए उसे कहीं ठंड न लग जाए, दंपति ने कमरे में रूम हीटर (ब्लोअर) लगा लिया। साथ ही इंडक्शन चूल्हे पर भगोने में पानी भी खौलने को रख दिया, ताकि गर्म भाप मिलती रहे। इसके बाद वह सो गए।
गुरुवार सुबह देर तक कोई नहीं उठा लेकिन जब कमरे के अंदर से बालक के रोने की आवाज आई तो अन्य परिजनों व पड़ोसियों ने जाकर देखा। दरवाजा खुलवाने को आवाज लगाई लेकिन कोई नहीं बोला। सिर्फ बच्चे के रोने की आवाज ही आती रही। गड़बड़ समझते हुए पड़ोसियों ने तत्काल दरवाजा तोड़ दिया तो अंदर बिस्तर पर पति पत्नी बेहोश मिले। परिजनों ने तत्काल दोनों को निजी चिकित्सालय में दिखाया तो डाक्टर ने गौरव को मृत घोषित कर दिया। जबकि रेखा को कुछ देर आक्सीजन देने के बाद होश आ गया लेकिन अभी भी आक्सीजन पर ही है।
अधिक हीमोग्लोबिन से बची नवजात शिशु की जान
डिप्टी सीएमओ संभल और बाल रोग विशेषज्ञ डा.कप्तान सिंह ने बताया कि बंद कमरे में ब्लोअर से आक्सीजन के बार बार ब्लोअर से गुजरने के कारण लगातार जलकर कम होती रहती है। पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिलने के कारण मौत हो जाती है। रही बात पच्चीस दिन के बालक के सुरक्षित रहने की तो शिशु का शरीर छोटा होने के कारण उसे आक्सीजन की कम मात्रा की जरूरत होती है, इसके अलावा छोटे बच्चे में हीमोग्लोबिन की मात्रा 16-17 ग्राम प्रतिशत होती है, जबकि सामान्य व्यक्ति में हीमोग्लोबिन करीब 12 ग्राम प्रतिशत होती है, वहीं गरीब परिवारों में बेहतर डाइट नहीं होने पर यह मात्रा छह सात ग्राम प्रतिशत रह जाती है। अधिक हीमोग्लोबिन होने व जरूरत कम आक्सीजन की होने के कारण ही बच्चा जीवित रहा।
सावधानियां-
-किसी भी तरह के ब्लोअर का प्रयोग सिर्फ जागते रहने तक ही करें
-सर्दी चाहे कितनी भी हो शयन कक्ष में रोशनदान जरूर खुला रहे
-सोते समय किसी भी तरह का ब्लोअर आदि चलता नहीं रहना चाहिए
-शयन कक्ष में आक्सीजन गैस का आवागमन होना बेहद आवश्यक है
-अंगीठी के कोयले से बेहद खतरनाक तत्व निकलते हैं, कमरे में न जलाएं
-गैस ब्लोअर का भी प्रयोग बंद कमरे में हानिकारक साबित हो सकता है
-सोते समय रजाई आदि से भी मुंह ढककर नहीं सोना चाहिए
संभल पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना ने बताया कि परिजनों ने किसी तरह की कोई कानूनी कार्रवाई करने से मना कर दिया था, इसलिए शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका। फिर भी मौके की वीडियोग्राफी कराई गई है। प्रथम दृष्टया कमरा पूरी तरह बंद होने व ब्लोअर आदि के प्रयोग से आक्सीजन की कमी के कारण ही मौत होना बताया जा रहा है।