‘साहस कौशलम बलम’ इस ध्येय वाक्य के साथ नीले आकाश में जांबाजी की गाथाएं लिखता रहा है आगरा का पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल। भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी पैराट्रूपिंग की ट्रेनिंग कर स्काई हॉक्स बने तो आगरा में।
यह देश का इकलौता पैराट्रूपिंग ट्रेनिंग सेंटर है। साहस और जांबाजी के कई मेडल इस ट्रेनिंग स्कूल के नाम पर दर्ज हैं तो शौर्य की कई गाथाएं भी जवानों को ट्रेनिंग के दौरान ऊर्जा से भर देती है।
आगरा एयरफोर्स में पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल की शुरुआत 1947 में आजादी के बाद हुई। स्क्वाड्रन लीडर टीएस गोपालन के नेतृत्व में चकलाला रावलपिंडी (पाकिस्तान) से विभाजन के बाद पैराजंट्रूपर्स की टीम आगरा आई और ट्रेनिंग स्कूल की शुरुआत हुई।
हालांकि देश में अक्तूबर 1941 में दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 50 स्वतंत्र पैरा ब्रिगेड स्थापित की गईं। तब एयरलैंडिंग स्कूल विलिंडगन (सफदरजंग एयरपोर्ट) में था। 1942 में यह स्कूल रावलपिंडी के चकलाला में शिफ्ट हो गया।