प्रयाग धर्म संसद ने कवर्धा धर्म संसद के निर्णय ‘साईं न तो संत न गुरु न भगवान’ पर मुहर लगा दी। धर्म संसद में सनातन धर्म के सभी संप्रदायों और अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
रविवार को ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकरचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और गोवर्द्धनपीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की मौजूदगी में हुई धर्मसंसद में सनातन धर्म के सभी संप्रदायों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने हर-हर महादेव के जयघोष के बीच मंदिरों से साईं प्रतिमा को हटाने का संकल्प दोहराया।
धर्मसंसद में सनातन धर्म का साईंकरण बंद करने सहित अविरल धारा बिना गंगारक्षा की बातें बेमानी, सनातनी पद्धति और सनातनी आचार्यों की ओर से रामजन्मभूमि पर बने राममंदिर, संपूर्ण देश में गोहत्या बंद हो, हिंदुओं का धर्मांतरण असंभव, पीके जैसी फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड जिम्मेदार बने, देश की राष्ट्रभाषा हिंदी में ही सरकारी योजनाओं के नाम रखे जाएं, सनातन धर्म संसद को स्थायी रूप, भारत की मूल संस्कृत को प्रोत्साहन सहित कुल नौ प्रस्ताव पारित किए गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिसका सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों, संत महंतों ने समर्थन किया।