भारत, जापान सहित दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था के केंद्र धमेख स्तूप की दीवारों में क्षरण से उसके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
क्षरण की वजह से स्तूप की दीवारों पर बनी कलाकृतियां नष्ट हो रही हैं और पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े टूटकर गिर रहे हैं। क्षरण की रोकथाम के लिए अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से बौद्ध अनुयायी चिंतित हैं।
कुछ महीने पहले देहरादून स्थित एएसआई (भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण) की विज्ञान शाखा के विशेषज्ञ यहां आए थे और जांच के लिए सैंपल भी ले गए लेकिन अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
12 दिसंबर को पीएम मोदी के साथ काशी आ रहे उनके जापानी समकक्ष शिंजो अबे के सारनाथ जाने की संभावना से एकबारगी फिर स्तूप के क्षरण का मसला चर्चा में है।