राजनयिक देवयानी प्रकरण में अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख दिखा रही भारत सरकार अमेरिकी कंपनियों के प्रति अभी भी दरियादिली दिखा रही है।
एक तरफ अमेरिकी कंपनियों के साथ करीब 13 अरब डॉलर के रक्षा सौदों को त्वरित गति से आगे बढ़ाया जा रहा तो दूसरी तरफ जनवरी में दिल्ली में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी में आने वाली अमेरिकी कंपनियों को कस्टम शुल्क से मुक्त रखने के आदेश दिए गए हैं।
इसके अलावा भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) को भी सरकार ने निर्देश दिया है कि रक्षा प्रदर्शनी में शामिल होने वाली अमेरिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों को होटल और दूसरी सुविधाओं में 40 से 50 फीसदी तक छूट दी जाए।
जानिए, राजनयिक देवयानी पर क्या हैं आरोप?
यह जानकारी देने वाले विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि आम तौर पर प्रक्रिया यह है कि भारतीय व्यापार प्रोत्साहन संगठन (आईटीपीओ) द्वारा दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में आयोजित होने वाली विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने वाली विदेशी कंपनियों से उनके सामान, जो प्रदर्शनी में स्टॉल्स में प्रदर्शित करने पर कस्टम शुल्क वसूला जाता है।
जब वह कंपनियां अपना सामान लेकर वापस जाती हैं तो उन्हें वह धनराशि वापस कर दी जाती है। लेकिन इस बड़ी धनराशि का करोड़ों रुपए का ब्याज सरकार के खाते में आ जाता है।
इन देशों में नाराजगी
इस बार सरकार ने अमेरिकी और यूरीपीय देशों की कंपनियों को यह कस्टम शुल्क जमा न करने की छूट दे दी, जबकि रूस और अन्य कई देशों की कंपनियों को यह छूट नहीं दी गई है। इसे लेकर इन देशों में नाराजगी भी है।
उधर देवयानी प्रकरण के बाद अमेरिका के साथ भारत की कूटनीतिक तनातनी को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों को यह रियायत देना भी समझ में नहीं आ रहा है, क्योंकि इससे करोड़ों रुपए के ब्याज का नुकसान भी सरकार को होगा।
इसके साथ ही आईटीडीसी को अमेरिकी कंपनियों को रहने और खाने पीने की सुविधाओं में 40 से 50 फीसदी की छूट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, कि यह रियायत सिर्फ अमेरिकी कंपनियों को ही क्यों दी जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार भले ही अमेरिका के व्यवहार को लेकर सख्त तेवर दिखा रही है, लेकिन नौकरशाही में बैठी अमेरिका परस्त लॉबी अभी भी अपने तरीके से काम कर रही है।