यूपीए सरकार के खिलाफ लोकसभा में वोटिंग के प्रावधान वाले काम रोको प्रस्ताव लाने की तृणमूल कांग्रेस की धमकी के बावजूद कांग्रेस सरकार बचाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। तृणमूल ने भले ही यूपीए सरकार को मात देने के लिए सपा और बसपा का समर्थन हासिल करने की कोशिश शुरू कर दी है। मगर कांग्रेस को इस बात का पूरा यकीन है कि यह दोनों दल ही सरकार की नैया पार लगवाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। तृणमूल कांग्रेस की कोशिशों को देखते हुए कांग्रेस के रणनीतिकार सपा और बसपा को अपने पाले में करने में लगातार जुटे हुए हैं।
कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद तृणमूल यूपीए सरकार की राह में रोड़े बिछाने की रणनीति में जुटी है। सोमवार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा है कि पार्टी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नियम 184 और 193 के तहत कामरोको प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। साथ ही पार्टी इस सिलसिले में सपा, बसपा और बीजू जनता दल का समर्थन हासिल करने के लिए बात करेगी।
तृणमूल कांग्रेस की इस धमकी को कांग्रेस कतई हल्के में नहीं ले रही है। पार्टी इसे गंभीरता से लेते हुए सियासी रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी के एक रणनीतिकार ने कहा कि बसपा और सपा से बातचीत जारी है और उनका समर्थन मिलने की पार्टी को पूरी उम्मीद है। वैसे भी तृणमूल के नाता तोड़ने के बाद यूपीए सरकार को सपा और बसपा का समर्थन जारी है। सपा और बसपा के पिछले रिकॉर्ड को देखें तो दोनों दल एक नहीं कई बार संसद में यूपीए सरकार के तारणहार बनते रहे हैं।
महंगाई और भ्रष्टाचार के मसले पर विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव को लेकर सपा और बसपा यूपीए सरकार को समर्थन दे चुकी है, जबकि राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव में तो दोनों पार्टियां पहले ही यूपीए सरकार की नैया पार लगवा चुकी है। शायद दोनों दलों के समर्थन का ही असर है कि कांग्रेस किसी भी स्थिति का सामना करने का दम भर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी कहते हैं कि हमें पूरा भरोसा है कि हम किसी भी हालात का मुकाबला करने के लिए सक्षम हैं। सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी और चुनाव अपने समय पर होगा।