मरने दो साले को! गजेंद्र को पेड़ पर झूलते देख एक पुलिस अधिकारी के मुंह से ये शब्द निकले थे। जंतर मंतर पर आयोजित आम आदमी पार्टी की रैली में लगभग 12.30 बजे के आसपास दौसा का किसान गजेंद्र सिंह पेड़ पर चढ़ा था। उसके हाथों में झाड़ू था और वह मोदी सरकार के विरोध में नारे लगा रहा था।
फर्स्टपोस्ट के मुताबिक, लोगों को लगा कि वह मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा है। उसने थोड़ी देर बाद सफेद गमछे से अपनी गर्दन में फंदा लगा लिया। अपनी दोनों बाहों से पेड़ की डालियों को पकड़ रखा था। पैरों से उसने एक दूसरी डाली से सहारा ले रखा था।
वह जब तक उस डाली के सहारे रहा, ठीक रहा। हालांकि नीचे खड़ी भीड़ लगातर शोर कर रही थी। मीडियाकर्मियों ने वहां खड़े पुलिसकर्मियों से कहा के वे गजेंद्र को नीचे उतारे। पुलिसकर्मी मूकदर्शक की तरह खड़े रहे। उन्हें पुलिसकर्मियों में से एक ने कहा, 'मरने दो साले को।'
मौत के दूसरे दिन राजनीतिक दलों में गुस्सा
जंतरमंतर पर आयोजित आम आदमी पार्टी की रैली में गजेंद्र सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। गजेंद्र की मौत के दूसरे दिन राजनीतिक दलों का गुस्सा संसद में दिखाई दिया।
भाजपा, कांग्रेस और आप समेत सभी दलों ने गजेंद्र सिंह की चिता पर राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश की। सांसदों और राजनीतिक दलों को व्यवहार ऐसा था कि लोकसभा अध्यक्ष सूमित्रा महाजन को भी कहना पड़ा कि कल तो कोई के बचाने नहीं गया, आज सब चर्चा करने के लिए तुले हुए हैं।
जंतरमंतर पर दिल्ली सरकार और पुलिस का व्यवहार कैसा रहा, ये कैमरे के जरिए दुनिया ने देखा। दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के तहत है। यही कारण रहा कि गजेंद्र की मौत की जिम्मेदारी केंद्र ओर दिल्ली एक दूसरे पर डालते रहे।
आप और केंद्र के बीच चला जुबानी युद्घ
गृहमंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में दिए बयान में आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि गजेंद्र जब पेड़ पर चढ़ रहा था, आप की रैली में शामिल भीड़ ताली बजा रही थी और नारे लगा रही थी। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की, लेकिन वे शांत नहीं हुए।
राजनाथ के आरोपों पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा कि गृहमंत्री जानबूझकर ऐसे आरोप लगा रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी को बर्बाद करने की कोशिश की जा रहा है।