सिपाही सुभाष तोमर की मौत के मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में अब दिल्ली पुलिस और राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल आमने-सामने हो गए हैं। दिल्ली पुलिस ने सिपाही के इलाज से संबंधित सभी ओरिजनल कागजात अस्पताल से मांगे हैं। अपराध शाखा के उपायुक्त एसबीएस त्यागी ने यह जानकारी दी है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने अस्पताल प्रशासन को पत्र भेजकर सिपाही के उपचार, अस्पताल में भर्ती और मौत मामले के ओरिजनल कागजात देने को कहा है। दिल्ली पुलिस की इस मांग पर अस्पताल प्रशासन सख्त हो गया है। उसका कहना है कि वह ओरिजनल कागजात नहीं दे सकता है। हां, जरूरी है तो इनकी फोटोकॉपियां दी जा सकती हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिपाही सुभाष तोमर को जब अस्पताल में लाया गया था तो पहले उसे मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद उसे सीआरपी (सीने को दबाने की प्रक्रिया) दी गई और सांसें आने लगीं। इस दौरान सिपाही मौत मामले की एमएलसी भी बन गई थी। पुलिस के वायरलेस सेट पर यह मैसेज भी फ्लैश हो गया था कि दिल्ली पुलिस के एक सिपाही मौत हो गई है। सीआरपी देने के बाद जब सिपाही की सांसें चलने लगीं तो एमएलसी से मृत शब्द को काटा गया था।
सिपाही का पोस्टमार्टम लेडी हार्डिंग में क्यों कराया गया, इस बारे में पूछने पर पुलिस अधिकारियों ने कहा कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पोस्टमार्टम नहीं होता है इसीलिए वहां ले जाया गया।