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दिलदार दिल्ली में बच्ची से दरिंदगी पर चौतरफा विरोध

Sat, 20 Apr 2013 02:58 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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‘दिलदार दिल्ली’ का तमगा लगे 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि दिल्ली फिर ‘दागदार’ हो गई।
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इस बार दरिंदगी का शिकार पांच साल की मासूम हुई है।

बच्ची एम्स में मौत से संघर्ष कर रही है। पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद लोगों में जबरदस्त गुस्सा है।

वारदात पर किसने क्या कहा-

दिल्ली महिलाओं के लिए असुरक्षित
दिल्ली महिलाओं के लिए असुरक्षित हो गई है। आए दिन बच्चियों और महिलाओं से बलात्कार या अभद्र व्यवहार हो रहा है।

‘दिलदार दिल्ली’ नहीं, आज राजधानी ‘बलात्कार दिल्ली’ हो गई है। कानून-व्यवस्था के खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाने की बजाए, मुख्यमंत्री दिल्ली के लोगों को यह कहकर पल्ला झाड़ लेती हैं कि यहां तो मेरी बेटी भी सुरक्षित नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल समय मिलने पर दिल्ली की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात करेगा।
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-विजय गोयल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

ऐसी जगहों पर नारेबाजी सही नहीं
लड़की को देखने गए थे कि इलाज कैसा चल रहा है। हमें बृहस्पतिवार से इसकी जानकारी थी लेकिन मुख्यमंत्री के अस्पताल में होने से स्वामी दयानंद अस्पताल नहीं जा सका था।

मुख्यमंत्री की हालत सामान्य होने पर स्वास्थ्य मंत्री के साथ पीड़िता को देखने पहुंचे थे। वहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी।

आपातकालीन कक्ष में जाने की कोशिश भी की जा रही थी। ऐसी जगहों पर नारेबाजी और राजनीति नहीं करनी चाहिए।
-संदीप दीक्षित, सांसद, पूर्वी जिला

दरिंदों को कानून का भी डर नहीं
दिल्ली में पुलिस और कानून का अब किसी को डर नहीं रहा है। राजधानी में 16 दिसंबर की घटना के बाद लगा था कि दिल्ली पुलिस संवेदनशील होगी।

लेकिन इस मामले में परिजनों को जिस तरह दो हजार रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, वह बेहद शर्मनाक है।

मासूम बच्ची से जिस तरह दरिंदगी की बात सामने आ रही है, उससे लगता है कि वह इंसान नहीं, कोई साइको होगा।

पुलिस ने अगर मुस्तैदी दिखाई होती तो उस बच्ची से ऐसा घृणित जघन्य अपराध नहीं होता। हम पुलिस कमिश्नर से मिलकर दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई के लिए बात करेंगे।
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-बरखा सिंह, अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग

दुष्कर्म की राजधानी बनी दिल्ली
पीड़िता के पिता को पैसे का लालच देकर मुकदमा दर्ज न कराने की बात कहना पुलिस का असंवेदनशील व अमानवीय चेहरा दिखाता है। उनकी पहचान कर बर्खास्त करने के साथ ही उन पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री बेशक राजधानी को दिलदार दिल्ली की संज्ञा दे रही हों, लेकिन यह दुष्कर्म की राजधानी बन गई है।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा
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