दिल्ली गैंगरेप मामले में जुवेनाइल बोर्ड ने अहम फैसला सुनाते हुए छठे आरोपी को नाबालिग करार दिया है। बोर्ड ने यह फैसला स्कूल प्रमाणपत्र के आधार पर सुनाया।
इस फैसले के बाद उसके अपराधों की सुनवाई अन्य पांचों आरोपियों के साथ नहीं होगी। साथ ही अगर इसी आधार पर उसके मामले की सुनवाई हुई तो उसे सख्त सजा भी नहीं हो पाएगी और अधिकतम तीन साल की सजा होगी। हालांकि दिल्ली पुलिस इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएगी।
यूपी के एक स्कूल प्रिंसिपल ने आरोपी का जो सर्टिफिकेट दिया है, उसके मुताबिक घटना के दिन उसकी उम्र 17 साल, छह महीने 12 दिन थी। इससे पहले किशोर न्याय बोर्ड ने जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि 16 दिसंबर को दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार कांड के छठे नाबालिग आरोपी पर बाकी पांच बालिग आरोपियों के साथ ही मुकदमा चलाया जाए।
गौरतलब है कि इसी आरोपी ने गैंगरेप के दौरान सबसे बर्बर और जघन्य वारदात को अंजाम दिया था। इसी ने बाकी आरोपियों को गैंगरेप के लिए उकसाया। इसके अलावा पीड़ित लड़की को भयंकर यौन यातना देते हुए उसके शरीर के अंदर सरिया डाल दी थी, जिसकी वजह से उसकी आंत भी निकालनी पड़ी थी।