राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में आयोजन समिति के निलंबित चेयरमैन सुरेश कलमाडी समेत 10 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय कर दिया है। इन सभी को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए अदालत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने व उनका उपयोग करने के आरोप में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष न्यायाधीश रविंदर कौर ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय करते हुए मामले की सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तिथि तय की है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई सप्ताह में चार दिन होगी, जिससे कि इसका निपटारा जल्द हो सके। सुनवाई के लिए मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शनिवार का दिन तय किया गया है।
कलमाडी के अलावा आयोजन समिति के पूर्व महासचिव ललित भनोट, पूर्व महानिदेशक वीके वर्मा, सुरजीत लाल, पूर्व संयुक्त निदेशक एएसवी प्रसाद, पूर्व कोषाध्यक्ष एम. जयचंद्रन, पीडी आर्य, एके मदान, एके रेड्डी व एक अन्य अभियुक्त के खिलाफ कोर्ट ने अभियोग तय किए हैं।
अपने विस्तृत फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई द्वारा पेश दस्तावेज और गवाहों के बयानों का अध्ययन करने के बाद वह महसूस करती हैं कि सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।
आरोपियों ने शिल्पा शेट्टी को किया 71 लाख का भुगतान
कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्लूजी) घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कहा कि मामले के दो आरोपियों ने फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को 71.73 लाख रुपये का भुगतान किया था। यह भुगतान वर्ष 2008 में पुणे में आयोजित सीडब्लूजी यूथ गेम्स के समापन समारोह में कार्यक्रम पेश करने के एवज में किया गया था।
कार्यक्रम को सिर्फ इसलिए भव्य तरीके से आयोजित किया गया था, क्योंकि सीडब्लूजी के संयोजक समिति के प्रमुख सुरेश कलमाडी ऐसा चाहते थे। शिल्पा को भुगतान करने वाले दो आरोपियों में फरीदाबाद के जेम इंटरनेशनल के प्रमोटर पीडी आर्या और एके मदान शामिल हैं। इन दोनों ने शिल्पा के कार्यक्रम के लिए मेसर्स विज क्राफ्ट इंटरनेशनल इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान किया था।
क्या है मामला
यह मामला कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए समय, स्कोर और रिकॉर्ड (टीएसआर) बताने वाले उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 141 करोड़ रुपये के ठेके के आवंटन में कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ा है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इन सभी अभियुक्तों ने षड्यंत्र रचकर स्विट्जरलैंड की एक कंपनी स्विस टाइमिंग को अवैध तरीके से ठेका दिया था। इस ठेके में अनियमितताओं के कारण सरकार को करीब 90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।