कला की समझ न रखने वाले चाहे जितना विरोध कर लें दिल्ली आर्ट गैलरी में चल रही प्रदर्शनी ‘द नैकेड एंड द न्यूड: द बॉडी इन इंडियन मॉडर्न आर्ट’ नहीं हटाई जाएगी। यह अपनी तय तारीख 15 मार्च तक जारी रहेगी। यह कहना है दिल्ली आर्ट गैलरी के डायरेक्टर आशीष आनंद का।
उन्होंने साफ कहा कि हम किसी पर प्रदर्शनी में आने के लिए दबाव नहीं डाल रहे। यह प्राइवेट शो है। फिर विरोध क्यों? आनंद के अनुसार जो लोग हिंदू संस्कृति का वास्ता देकर प्रदर्शनी का विरोध कर रहे हैं वे अपने इतिहास और संस्कृति को जानते ही नहीं।
उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका जब आधुनिक भारतीय कला के इतिहास की ऐसी पेंटिंगों को साझा मंच मिला है, जहां हमारे चित्रकारों का ‘शरीर’ के प्रति सामने आता है। इस प्रदर्शनी में अगर राजा रवि वर्मा के चित्र हैं, तो अमृता शेरगिल, एमएफ हुसैन, फ्रांसिस न्यूटन सूजा, चित्ताप्रसाद, राम किंकर बैज औप के.लक्ष्मा गौड़ के भी।
आशीष आनंद कहते हैं, ‘शो में लगी पेंटिंगें हमारी धरोहर हैं। पचास, साठ और अस्सी साल पुरानी कलाकृतियां यहां हैं। वे सिर्फ इतना बताती हैं कि कलाकार ने शरीर को किस प्रकार देखा और उकेरा।’ एक तरफ सूजा, अकबर पदमसी, गोगी सरोज पाल और जोगन चौधरी की पेंटिंग मन की आंखों से शरीर को देखती हैं, तो दूसरी तरफ केएच आरा, एए राबिया, एमएफ हुसैन, हेमेंद्रनाथ मजूमदार के चित्रों में शरीर अपनी भव्यता के साथ प्रतिष्ठित है।
प्रदर्शनी में अनुपम सूद और रणबीर कालेका जैसे कलाकारों की भी पेंटिंग्स हैं जो आधुनिक जीवन में स्त्री-पुरुष के जटिल संबंधों को उकेरती हैं। सूद की टेस्ट ट्यूब बेबी थीम पर आधारित पेंटिंग ‘डार्लिंग गेट मी अ बेबी मेड’ और कालेका की ‘वूमेन रेसलिंग विद लॉयन’ ध्यान आकर्षित करती हैं।
पश्चिम बंगाल के अकाल (1943-44) का जीवंत चित्रण करने के लिए विख्यात कम्युनिस्ट रुझान के चित्रकार चित्ताप्रसाद की भी महिलाओं को लेकर बनाई पेटिंग मौजूद हैं। वहीं रामगोपाल विजयवर्गीय की न्यूड पेटिंग्स में अजंता की झलक यहां है।
ऐसा नहीं है कि इस कला प्रदर्शनी में सिर्फ महिला शरीर की पेटिंग्स हैं। न्यूड मेल फिगर भी यहां बड़ी संख्या में हैं। जोगेन चौधरी, अकबर पदमसी, हुसैन, के.लक्ष्मा गौड़ और सूजा की पेटिंग में पुरुष शरीर निर्वस्त्र हैं। वास्तव में यह कला प्रदर्शनी भारतीय चित्रकला की बीते करीब सौ वर्षों की समृद्ध यात्रा का बखान है। नि:संदेह यह किसी विवाद के लिए आयोजित नहीं है। कला की पढ़ाई मानव शरीर की संरचना के पाठ के बगैर अधूरी है।
इस पाठ में पहली ही पंक्ति पढ़ाई जाती है: मानव शरीर अपने आप में सुंदर है। इस प्रदर्शनी में आप यह भी देख सकते हैं कि हर कलाकार कैसे अपने आप में अनूठा है। इन चित्रों को सिर्फ ‘जिस्म’ की तरह देखना सही नहीं, इनमें रूह भी है। जो कुछ बयान करती है।
पहले से थी योजना
जो लोग दिल्ली गैंगरेप और बाद की घटनाओं से इस प्रदर्शनी को जोड़ कर देख रहे हैं वे गलत हैं। प्रदर्शनी की योजना अक्तूबर-नवंबर में ही बना ली गई थी। इंडिया आर्ट फेयर के दौरान देश-दुनिया के लोग दिल्ली में जुटते हैं, ऐसे में यह इस शो के आयोजन का सबसे सही समय है।- आशीष आनंद, डायरेक्टर, दिल्ली आर्ट गैलरी
यह पाप कुंभ नहाने से भी नहीं धुलेगा
कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल के अनुसार हम अपने समाज और परिवार में फिल्म, टीवी और संगीत की तो खूब बातें करते हैं, लेकिन कला पर बात नहीं होती। जब हम प्रदर्शनी को नैकेड एंड न्यूड शीर्षक से जोड़कर देखते हैं तो गड़बड़ शुरू होती है। साफ है कि हम इसे कला की तरह नहीं देख रहे।
हमें समझना होगा कि यह पोर्नोग्राफी नहीं है। यहां कैनवास पर रेखाएं और रंग हैं। क्या हम खजुराहो और कोणार्क को पोर्न फिल्म की तरह देखते हैं। अगर नहीं तो इस प्रदर्शनी को क्यों? कला के खिलाफ फतवे बंद होने चाहिए। मैं कला के ऐसे विरोध को पाप मानता हूं। ऐसा पाप, जो कुंभ नहाने से भी नहीं धुलेगा।
--80 चित्रकारों की 258 कृतियां प्रदर्शन के लिए रखी गई हैं।
आर्ट गैलरी के देवी-देवताओं की पेटिंग्स हटाईं
बंगलूरू। यहां चित्रकला परिषद आर्ट गैलरी में फोन पर मिली धमकियों और पुलिस के सुझावों के बाद एक युवा कलाकार द्वारा बनाई निर्वस्त्र देवी-देवताओं की तीन पेटिंगों को हटा लिया गया है। आर्ट गैलरी के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्रीधर ने बताया कि अरविंद साईंनाथ कृष्णमणि के चालीस चित्रों की प्रदर्शनी में से तीन पर दर्शकों ने आपत्ति की थी। गैलरी में धमकी भरे फोन आने लगे तो पुलिस से शिकायत की गई। तब पुलिस ने भी गैलरी वालों सुझाव दिया कि वे पेंटिंग हटा लें।
कला प्रदर्शनियों को सरकार का समर्थन
तमाम तरह की कट्टरताओं की आड़ में कला का विरोध करने वालों से सरकार ने कहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करना सीखें। दिल्ली आर्ट गैलरी में लगी प्रदर्शनी के विरोध के मद्देनजर सरकार ने स्पष्ट किया कि वह कला को संरक्षण देती रहेगी और जिन्हें भी रचनात्मकता से विरोध है, वे सही मंच पर आएं। हर कहीं हंगामा न करें।
गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने कहा कि बोलने की आजादी, कला के प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हम पूरा सम्मान करते हैं। जो कला का विरोध करना चाहते हैं वे गैलरियों तक न जाएं। सही मंच पर अपनी बात रखें।