रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने भले ही पाकिस्तान में भारतीय खुफिया तंत्र को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार पूर्व प्रधानमंत्रियों का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन खुफिया एजेंसियों के अनुसार, उनका इशारा आई के गुजराल की तरफ है। वर्ष 1997-98 में हुए एक फैसले से खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी के अधिकारियों में आज भी नाराजगी है।
ये अधिकारी इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को भी दोषी मानते हैं। देसाई ने 70 के दशक के अंतिम दौर में पाकिस्तान के नाभिकीय कार्यक्रम के खिलाफ सफलतापूर्वक चल रहे रॉ के ऑपरेशन ‘काहुटा’को अचानक रोक दिया था। एजेंसी में व्याप्त नाराजगी की एक वजह यह भी है कि इन राजनीतिक फैसलों के चलते पाकिस्तान में उनके कई एजेंटों को पाक ने मार दिया।
खुफिया अधिकारी परिकर के बयान को तर्कसंगत करार दे रहे हैं। खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि गुजराल सिद्धांत (डॉक्ट्रिन) का सबसे बड़ा खामियाजा पाकिस्तान में मजबूत रॉ के नेटवर्क का कमजोर होना है।