नेताजी सुभाष चंद्र बोस 18 अगस्त 1945 को हुई विमान दुर्घटना में बुरी तरह झुलस गए थे। नेताजी से संबंधित सार्वजनिक हुए फाइलों में दर्ज गृह मंत्रालय के पत्राचार में नेताजी के थर्ड डिग्री स्तर तक जलने की बात लिखी गई है।
कागजात के मुताबिक नेताजी उस दिन ताईहोकु से उड़ने वाले जापान के बमवर्षक विमान में बड़ी मुश्किल से दो सीटें मिली थी। उन्होंने अपने साथी हबीबुर रहमान के साथ उसी विमान से जाने का फैसला किया था।
कागजात के मुताबिक 1970 में गठित जी डी खोसला कमीशन ने 240 गवाहों के आधार पर इस नतीजे पर पहुंची थी। नेताजी के बुरी तरह झुलसे हुए शरीर को डाक्टरों में बचाने की हर संभव कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए। उस विमान में सवार पायलट, नेवीगेटर और नेताजी के साथी हबीबुर रहमान की भी जलने से ही मौत हुई थी।