दिल्ली गैंगरेप के बाद देश में बलात्कारियों को नपुंसक बनाए जाने और फांसी दिए जाने की मांग जोरों पर है। इसी बीच इस बात पर भी एक बहस शुरू हो गई है कि रेपिस्टों को नपुंसक कैसे बनाया जाए?
दिल्ली गैंगरेप के बाद दुर्लभतम मामलों में दोषियों को रासायनिक प्रक्रिया से नपुंसक बनाना कांग्रेस के उन प्रस्तावों में शामिल हैं जिन्हें वो जस्टिस जेएस वर्मा के नेतृत्व वाली समिति को सौंपेंगे। लेकिन डॉक्टरों ने दुष्कर्म के दोषियों का केमिकल कास्ट्रेशन नहीं, बल्कि सर्जिकल कास्ट्रेशन की वकालत की है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक किसी व्यक्ति को मात्र तीन महीनों के लिए ही रासायनिक प्रक्रिया से नपुंसक बनाया जा सकता है। आईएमए के अध्यक्ष डॉक्टर के. विजय कुमार के अनुसार अभी तक ऐसी कोई दवा नहीं बनी है, जो रासायनिक प्रक्रिया से ताउम्र नपुंसक बना सके। इसलिए डॉक्टर इसे सही नहीं मान रहे हैं।
तो ऐसे में दोषियों को ताउम्र नपुंसक बनाने की बात लोगों की भावनाओं से मात्र खिलवाड़ ही नजर आ रहा है। अगर बलात्कारी को आजीवन नपुंसक बनाना है, तो ऑपरेशन कर उसका अंडकोश ही निकालना पड़ेगा। जबकि प्रस्तावित कानून में ऐसा नहीं है।
क्या है केमिकल कैस्ट्रेशन
केमिकल कैस्ट्रेशन में मरीज को एक रासायनिक इंजेक्शन दिया जाता है जिससे वो एक तरह से नपुंसक बन जाता है। इसमें मरीज के 'टेस्टिस' यानी वीर्यकोष को निकाला नहीं जाता लेकिन वो काम नहीं कर पाता। उसके हॉरमोन नहीं बनते जिससे उसमें सेक्स की इच्छा नहीं रहती।
इस दवा का उपयोग वर्तमान में प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों के लिए किया जाता है। लेकिन फिलहाल दुनिया भर में जो ड्रग्स उपलब्ध है वह केवल तीन महीने के लिए कारगर हैं। अगर यह सही है तो एक साल के लिए एक दुष्कर्मी को चार बार इंजेक्शन लगाने की जरूरत होगी और यह काम राज्य सरकार को करना होगा। यही वजह है कि डॉक्टर समुदाय भी सर्जिकल कास्ट्रेशन की बात को ज्यादा उचित बता रहे हैं।
विदेश में नपुंसक बनाने का विकल्प भी
विदेश में रेप के दोषी को केमिकल और सर्जिकल तरीके से नपुंसक बनाने का विकल्प भी है। हिंसात्मक रेप के मामले में अमेरिका के अधिकतर हिस्सों में उम्रकैद की सजा दी जाती है। मगर कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, लोवा, लुसियाना, मोनटाना, ओरेगॉन, टैक्सास और विस्कॉन्सिन जैसे अमेरिकी राज्यों में रेप के दोषी को केमिकल और सर्जिकल तरीके से नपुंसक बनाने का विकल्प भी है।
'केमिकल कैस्ट्रेशन ने नहीं बदलेगी मानसिकता'
दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव के मुताबिक यह बिल्कुल बकवास सुझाव है। किसी ने कह दिया और किसी राजनेता ने मान लिया, ऐसा तो नहीं हो सकता। बलात्कार एक सामाजिक समस्या है। इसका रिश्ता इस बात से है कि हमारे यहां मर्दानगी के बारे में या औरतों के बारे में क्या सोचते हैं। केमिकल कैस्ट्रेशन से यह मानसिकता नहीं बदल सकती। हम किसी समस्या के दीर्घावधि समाधान के बारे में सोचना नहीं चाहते हैं। इससे किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। हमें समाजिक बदलाव की बात करनी होगी। इसका समाधान जैविक नहीं हो सकता।
आखिर गैंगरेप में फांसी की सजा क्यों नहीं?
इस बहस के साथ यह मांग भी हो रही है कि आखिर गैंगरेप में फांसी की सजा क्यों नहीं? हालांकि भारत में मौजूदा कानून के तहत गैंगरेप में अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में एक तरफ जहां कई लोगों का मानना है कि ऐसे मामले में फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कई कानूनी जानकार मानते हैं कि फांसी की सजा ऐसी समस्या का समाधान नहीं है। बल्कि ऐसे मामले में मौजूदा सजा काफी है।
आपकी नजर में बलात्कार के दुर्लभतम मामलों में दोषियों को किस तरह ही सजा दी जानी चाहिए?