छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हुए नक्सली हमले में कई बड़े राजनेताओं की हत्या हुई है। इस हमले ने पूरे देश को एक बार फिर नक्सलवाद की समस्या पर सोचने को मजबूर कर दिया है।
नक्सली हमले के बाद जहां राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है, वहीं, सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है।
:- क्या भारत के गृह मंत्री हालिया नक्सलवादी हमले पर भी कोई बयान देंगे। जैसे "हमें रिपोर्ट मिल गई थी..."
निखिल साहनी@sawhneynikhil
:- हमारे गृह मंत्री इस वक्त कहां हैं और वो नक्सलवाद के खतरे से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं। हां, हो सकता है कि वह गुप्त रणनीति बनाने में बहुत ज्यादा व्यस्त हों।
मनीष छिब्बर@maneeshchhibber
:- जब खुद के लोगों पर गुजरी तो मनमोहन सिंह ने तुरंत जबान खोली ..!!!
@एक और इंकलाब
:- मनमोहन सिंह ने नक्सली हमले की कड़ी निंदा की है। उनकी कड़ी निंदा से डर कर नक्सली आत्मसमर्पण भी कर सकते हैं।
@व्यंग
:- एक व्यापक और दूरदर्शी योजना के तहत नक्सल प्रभावित सभी राज्यों को साथ लेकर चलने के लिए हमें सरदार पटेल की जरूरत है।
किरन बेदी@thekiranbedi
:- चुनावी मौसम के दौरान नक्सल हमला, बहुत कुछ कहता है। सवाल ये है कि हमले से किसे फायदा मिलेगा?
महेश कुमार@GutsyIndian
:- जब एक नेता मरता है तो इतना हो-हल्ला मचता है। बॉर्डर और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की मौत पर कोई कुछ नहीं बोलता। क्या उनकी जान की कोई कीमत नहीं।
सन्नी सिन्हा@funnyfinha
:- अब कोई नक्सलियों पर हमला करने के बारे में क्यों नहीं बोल रहा? हम हमेशा पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर हमले की योजना बनाते हैं, तो हमारे जंगलों में स्थित नक्सल शिविरों को क्यों नहीं?
अस्मा रिजवान@asmariz
:- जब नक्सलवादी सीआरपीएफ जवानों को मारते हैं तो कोई इसे गंभीरता से नहीं लेता। अब जब राजनेता मारे गए हैं तो हम जाग रहे हैं। नक्सलियों के खिलाफ सशस्त्र बल प्रयोग करने की जरूरत है।
मौलिक शाह@maulik1122
:- कई नक्सली हमलों में सीआरपीएफ के जवान भी शहीद हुए हैं लेकिन प्रधानमंत्री, सोनिया और राहुल कभी उन्हें देखने नहीं गए। मीडिया भी कुछ टिकर या बयानबाजी के अलावा कभी इसे मुद्दा नहीं बनाता।
निधि बहुगुणा@vinirish