सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। बृहस्पतिवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे दोषियों को मौत की सजा दे देना बेहतर होगा।
केंद्र सरकार ने तमिलनाडु द्वारा राजीव गांधी के दोषियों को छोड़ने के निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि हम सभी उम्मीद में जीते हैं।
अगर यह जायज स्थिति है, तब ऐसे दोषियों के लिए कोई उम्मीद नहीं होगी। किसी शख्स को पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे रखने का क्या मतलब है। उसे मौत की सजा दे देनी चाहिए।
यही अच्छा रहेगा। अदालत ने केंद्र सरकार से आजीवन कारावास की तार्किकता के बारे में भी सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि हम सुधारात्मक दंड व्यवस्था का पालन करते हैं।
यदि आजीवन कारावास की सजा पाए अपराधी को अपने छूटने की उम्मीद नहीं होगी तो वह खुद को सुधारने का प्रयास क्यों करेगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्यों को कुछ मामलों में सजा में छूट देने की अनुमति प्रदान कर दी।