पिछले दो वर्षों से देश में पोलियो का एक भी मामला सामने न आने का ढिंढोरा पीट रही सरकार के दावे की पोल खुल गयी है।
पिछले माह महाराष्ट्र में पोलियो का वायरस पाया गया। यही नहीं जिस बच्चे को पोलियो हुआ था। दो दिन पहले उसकी मौत भी हो गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ केंद्र सरकार को फिर से पोलियो के खिलाफ अभियान चलाने की नसीहत दी है। बल्कि अगले वर्ष भारत को मिलने वाले पोलियो मुक्त देश के तमगे से भी हाथ धोने की आशंका बलवती हो गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. नेटा मेनाब्दे ने कहा कि भारत में टीके के जरिए पोलियो रोकथाम कार्यक्रम फिर से तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान भारत में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन चूंकि भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पोलियो ग्रस्त देशों के पड़ोस में है।
इसलिए वहां वाइल्ड पोलियो वायरस का खतरा मौजूद है। लिहाजा यहां पोलियो की रोकथाम के लिए सरकार को फिर से अभियान चलाना जरूरी हो गया है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के बीड जिले के धारूर मंडल में 11 वर्ष के एक बच्चे को टीका लगाने के बाद भी पोलियो हो गया था। पोलियो के कारण उसके मस्तिष्क को क्षति पहुंची थी।
बच्चे को सात मई को सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था जहां 22 जून को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से टीका लगाने से पैदा होने वाले पोलियो के खिलाफ अभियान को पुन: जोर शोर से चलाने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
यही नहीं पिछले दो वर्षों से देश में पोलियो का एक भी मामला सामने न आने से भारत को अगले वर्ष मिलने वाले पोलियो मुक्त देश के तमगे पर भी आशंका के बादल मंडराने लगे हैं।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि वर्ष 2012 में भारत को पोलियो ग्रस्त देशों की सूची से हटा दिया गया था। क्योंकि यहां एक वर्ष के दौरान वाइल्ड पोलियो वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया था। भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त प्रमाण पत्र प्राप्त होना है।