भारतीय मूल के डॉक्टर समेत ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टरों की एक टीम ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की। इन डॉक्टरों ने ‘मृत’ हृदय को दोबारा सक्रिय कर जीवित मरीज में प्रत्यारोपित करने में सफलता हासिल की है। इसे दुनिया का पहला मृत हृदय प्रत्यारोपण माना जा रहा है।
इस सफलता से दुनिया में महत्वपूर्ण अंगों को दान करने की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद है। अभी तक प्रत्यारोपण के लिए ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती थी, जिसका हृदय तो धड़कता था लेकिन वह दिमागी रूप से मृत (ब्रेन डेड) होता था।
इस सफलता को बहुत बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे प्रत्यारोपण के लिए मौजूद हृदयों के पूल में बढ़ोतरी की उम्मीद है। सिडनी के सेंट विंसेंट अस्पताल के हार्ट लंग ट्रांसप्लांट यूनिट के निदेशक प्रोफेसर पीटर मैकडोनाल्ड का कहना है कि इस सफलता का मतलब है कि हम और भी मृत हृदयों को जिंदा कर प्रत्यारोपित कर सकते हैं। वर्षों से अंग दानदाताओं के नहीं मिलने से कई मुश्किलें आती रही हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में अब तक ऐसे तीन हृदयों को प्रत्यारोपित किया जा चुका है जो धड़कना बंद कर चुके थे और दानदाता से मरणोपरांत लिए गए थे। प्रत्यारोपण में ऐसे हृदयों का इस्तेमाल किया गया जोकि 20 मिनट पहले मृत घोषित किए जा चुके थे।
तस्वीरें साभार: http://www.theaustralian.com.au/