यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आधार से अब पीछा छुड़ाने की तैयारी है। मोदी सरकार के आने के बाद अब वित्त मंत्रालय भी मान रहा है कि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम (नकद भुगतान) को बिना आधार के भी चलाया जा सकता है।
इसके लिए कई सारे फुल प्रूफ मैकेनिज्म हो सकते हैं, जो नकद भुगतान योजना को बैंकों के जरिए बेहतर तरीके से चला सकते हैं। इस संबंध में वित्तीय सेवा मामलों के विभाग ने भी नकद भुगतान का समर्थन किया है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार वह सब्सिडी नकद रुप में देने के पक्ष में है। ऐसा इसलिए हैं कि यूपीए सरकार के समय वित्तीय समावेशन योजना के जरिए जीरो बैलेंस वाले खातों को बैंकों ने बड़े पैमाने पर खोल दिया है। जिसमें से ज्यादातर खातों में लेन-देन न के बराबर है।
बिना आधार फुल प्रूफ मैकेनिज्म पर जोर
ऐसे में वित्त मंत्रालय डीबीटी स्कीम को चालू रख इसे बैंकों के लिए लाभकारी बनाना चाहता है। साथ ही इसके जरिए भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसी जा सकेगी। पंजाब नेशनल बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार डीबीटी स्कीम को लागू करने के लिए पूरा ढांचा तैयार हो चुका है। स्कीम को आधार कार्ड के जरिए जोड़ने के फैसले की वजह से पूरा मामला अटक गया।
अगर डीबीटी को बिना आधार के दूसरे मैकेनिज्म के जरिए लागू किया जाए, तो उसे आसानी से लागू किया जा सकता है। साथ ही बैंकों के लिए भी बिजनेस लाभकारी बन सकता है।
वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में सरकारी बैंकों ने भी कहा है कि डीबीटी को नए मैकेनिज्म के साथ लागू किया जा सकता है। इसके लिए ढांचा बड़े स्तर पर तैयार किया जा चुका है।
हिचकोले खाती रही स्कीम
डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम (डीबीटी) को 31 जनवरी 2014 तक केवल 127 जिलों में ही शुरू किया जा सका है। जिसके तहत केवल 27 योजनाओं को शामिल किया जा सका।
उसमें भी 31 दिसंबर 2013 तक केवल 628 करोड़ रुपये राशि ही हस्तांतरित की गई है। जो लक्ष्य से बहुत पीछे रही इसी तरह एलपीजी स्कीम जो सबसे ज्यादा 2.1 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही थी, उसे भी शिकायतों की वजह से निलंबित कर दिया गया है।